Last updated: August 5th, 2026 at 09:35 am

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में मार्च निकाला और गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की।
महात्मा गांधी की प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च
विपक्षी नेताओं का मार्च संसद परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से शुरू होकर संसद भवन के मकर द्वार तक पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “अमित शाह जवाब दो” लिखे बैनर के साथ नारेबाजी करते हुए सरकार से इन मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की।
कई वरिष्ठ नेता हुए शामिल
विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव सहित कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। नेताओं ने संसद के भीतर इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया।
सरकार से सदन में जवाब देने की मांग
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह संसद में उपस्थित होकर इन मुद्दों पर अपना पक्ष रखें। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद ही जनता के सवालों का जवाब देने का सबसे बड़ा मंच है और सरकार को चर्चा से पीछे नहीं हटना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने उठाई जवाबदेही की मांग
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
राम मंदिर और छात्र आंदोलन के मुद्दे भी बने केंद्र में
विपक्षी दलों ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले और विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों पर सरकार को संसद में विस्तृत बयान देना चाहिए और सभी पक्षों की मौजूदगी में चर्चा करानी चाहिए।
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