Last updated: June 12th, 2026 at 01:37 pm

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के बीच भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फिनलैंड में आयोजित प्रतिष्ठित “कुल्तारांता टॉक्स” कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका प्रभाव केवल संघर्ष वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर पड़ रहा है।
इस कार्यक्रम में फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनेन और संयुक्त अरब अमीरात की सहायक विदेश मंत्री लाना नुसेबैह भी शामिल थीं। चर्चा का विषय था “उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा”, जिसमें बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया को अधिक मजबूत और विविधीकृत सप्लाई चेन की आवश्यकता है। उनका मानना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न संघर्षों और वैश्विक संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी एक क्षेत्र या आपूर्ति स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए देशों को अपनी आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए आपूर्ति प्रणालियों को अधिक लचीला बनाना होगा।
ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भी भारत ने अपना स्पष्ट रुख दोहराया। जयशंकर ने कहा कि भारत के ऊर्जा संबंधी निर्णय राष्ट्रीय हित, उपलब्धता और वहनीयता के आधार पर लिए जाते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलते वैश्विक वातावरण में प्रत्येक देश को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक निर्णय लेने पड़ते हैं।
फिनलैंड यात्रा के दौरान जयशंकर ने वहां की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनेन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। दोनों नेताओं ने भारत-फिनलैंड रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, 6G, स्वच्छ ऊर्जा, स्टार्टअप और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भी भारत की वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए उसे एक “प्रभावशाली वैश्विक शक्ति” बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत के विचार और दृष्टिकोण बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, यूक्रेन संघर्ष और आगामी G7 शिखर सम्मेलन जैसे विषयों पर भी चर्चा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आज केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाने के कारण भारत का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इसी कारण दुनिया के प्रमुख देश भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि वर्तमान समय में कूटनीति, आर्थिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी किसी भी देश की विदेश नीति के प्रमुख आधार बन चुके हैं। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को बहुआयामी बनाने पर ध्यान दे रहा है।
फिलहाल फिनलैंड में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सक्रिय भागीदारी ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के समाधान में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मजबूत सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भारत का जोर आने वाले समय में वैश्विक नीति चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है।
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