Last updated: June 12th, 2026 at 01:40 pm

भारत और रूस के बीच दशकों पुराने संबंधों को लेकर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी समय की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते राजनीतिक और आर्थिक हालात के बावजूद भारत और रूस के संबंध लगातार मजबूत बने हुए हैं और दोनों देश कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं।
विदेश सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और रूस के संबंध केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और दीर्घकालिक सहयोग ने इस साझेदारी को विशेष बनाया है।
भारत और रूस के संबंधों का इतिहास कई दशकों पुराना है। शीत युद्ध के दौर से लेकर वर्तमान समय तक दोनों देशों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बनाए रखा है। रूस लंबे समय से भारत का एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार रहा है और दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों, तकनीकी सहयोग और संयुक्त परियोजनाओं को लेकर मजबूत संबंध रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत और रूस का सहयोग लगातार बढ़ा है। हाल के वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरी है। ऐसे में दोनों देशों ने ऊर्जा आपूर्ति, तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
व्यापारिक संबंधों के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने नए अवसरों की तलाश शुरू की है। भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि दर्ज की गई है और दोनों देश व्यापारिक सहयोग को और विस्तारित करने के प्रयास कर रहे हैं। कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, तकनीक और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है। ऐसे में भारत और रूस दोनों ही अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखने के साथ-साथ नए सहयोग क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय संवाद इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
भारत की विदेश नीति में बहुपक्षीय सहयोग को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। भारत अमेरिका, यूरोप, जापान और अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ रूस के साथ भी अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संतुलित दृष्टिकोण भारत की विदेश नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
रूस ने भी कई अवसरों पर भारत को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार बताया है। दोनों देशों के नेताओं के बीच नियमित मुलाकातें और संवाद इस बात का संकेत हैं कि दोनों पक्ष भविष्य में भी सहयोग को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। BRICS, SCO और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भी भारत और रूस कई मुद्दों पर साथ काम करते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच भारत-रूस संबंधों का महत्व बना रहेगा। रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा व्यापार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर भी संबंधों को नई दिशा दे सकते हैं।
फिलहाल विदेश सचिव विक्रम मिस्री के बयान ने एक बार फिर भारत और रूस के मजबूत संबंधों को रेखांकित किया है। दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को भविष्य में भी वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक माना जा रहा है।
![]()
Comments are off for this post.