Last updated: June 12th, 2026 at 01:45 pm

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स लगभग 1,700 अंक उछलकर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 23,600 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी के कारण निवेशकों की कुल संपत्ति में ₹10 लाख करोड़ से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीदें रहीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने की संभावना से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत साबित हुई। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कमी आने से भारत जैसे तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी। कम तेल कीमतों का असर महंगाई और आयात बिल पर पड़ सकता है, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा।
दिनभर के कारोबार में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। बाजार में व्यापक खरीदारी के कारण केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रुपये की मजबूती ने भी बाजार को समर्थन दिया। मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक बनाता है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।
सेंसेक्स 75,500 अंकों के ऊपर बंद हुआ, जबकि निफ्टी लगभग 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,622 के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले दो महीनों में बाजार का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। बाजार पूंजीकरण में हुई वृद्धि ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशकों में सतर्कता थी। लेकिन हालिया सकारात्मक संकेतों ने जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है। इसी वजह से शेयर बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी देखने को मिली।
हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दी है। उनका कहना है कि बाजार में आई यह तेजी सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रमों और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए रखना आवश्यक होगा। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में किसी भी बड़े बदलाव का असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।
वित्तीय क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और वैश्विक माहौल स्थिर बना रहता है, तो भारतीय बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को दीर्घकालिक रणनीति अपनाने और बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में आई इस जोरदार तेजी ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत बढ़त ने यह संकेत दिया है कि सकारात्मक वैश्विक संकेत और मजबूत निवेशक भावना बाजार को नई ऊर्जा प्रदान कर सकती है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बनी रहेगी।
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