Last updated: June 15th, 2026 at 10:55 am

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha ने कहा है कि कश्मीरी पंडितों की अपनी मातृभूमि में सम्मानजनक वापसी ही प्रदेश के पुनर्निर्माण और स्थायी शांति की सबसे बड़ी पहचान होगी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अब विकास, अवसरों और सामाजिक पुनरुत्थान के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
श्रीनगर में आयोजित ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने देश और विदेश में बसे कश्मीरी पंडितों से जम्मू-कश्मीर के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने उद्योग, शिक्षा, संस्कृति और नवाचार के क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय ने कठिन परिस्थितियों, विस्थापन और संघर्षों के बावजूद हार नहीं मानी। समुदाय ने चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। तकनीक, व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियां प्रेरणादायक हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि बीते वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। उनका मानना है कि वर्ष 2019 के बाद प्रदेश में ऐसा माहौल बना है, जिसने विस्थापित समुदाय के भीतर अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने की नई उम्मीद जगाई है।
उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों का इतिहास केवल पीड़ा और संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साहस, धैर्य और पुनर्निर्माण की मिसाल भी है। आज समुदाय की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि कठिन परिस्थितियां भी संकल्प और मेहनत के सामने टिक नहीं सकतीं।
कार्यक्रम में विभिन्न देशों और राज्यों से आए कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रतिनिधियों, उद्यमियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। सम्मेलन में सांस्कृतिक संरक्षण, आर्थिक सशक्तिकरण और समुदाय की भावी भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
उपराज्यपाल ने विश्वास जताया कि कश्मीरी पंडित समुदाय की सक्रिय भागीदारी न केवल जम्मू-कश्मीर के विकास को नई गति देगी, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान साबित होगी।
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