Last updated: June 17th, 2026 at 03:35 am

बिहार की राजनीति में विधान परिषद (MLC) चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की आठ सीटों, चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर होने वाला यह चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है।
हालांकि बिहार में विधानसभा चुनाव को सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाबला माना जाता है, लेकिन इस बार MLC चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। इन सीटों पर उम्मीदवारों की जीत-हार केवल व्यक्तिगत नहीं होगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि शिक्षित वर्ग और शिक्षक समुदाय में किस राजनीतिक गठबंधन की पकड़ मजबूत है।
इस बार मुकाबला पिछली बार से काफी अलग और कड़ा माना जा रहा है। हाल के चुनावों में कई सीटों पर निर्विरोध परिणाम देखने को मिले थे, लेकिन इस बार सभी प्रमुख सीटों पर सीधा मुकाबला होने की संभावना है।
पटना स्नातक सीट पर सबकी नजर
सबसे अधिक चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की हो रही है। यहां जदयू के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार एक बार फिर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। पिछली बार उन्होंने राजद समर्थित उम्मीदवार को हराया था। हालांकि इस बार समीकरण बदले हुए हैं क्योंकि उनके प्रतिद्वंद्वी आजाद गांधी अब भाजपा के साथ जुड़े बताए जा रहे हैं। इस सीट का परिणाम राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
तिरहुत स्नातक क्षेत्र में कड़ा मुकाबला
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी चुनावी मुकाबला रोचक होने वाला है। लगभग 1.35 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में पिछली बार निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। जदयू के अभिषेक झा इस बार फिर से अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी टक्कर
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। पटना शिक्षक क्षेत्र से नवल किशोर यादव सक्रिय हैं। वहीं तिरहुत शिक्षक सीट पर वामपंथी नेता संजय कुमार सिंह लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। पिछली बार उन्होंने जदयू उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी, जिससे इस बार मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
सारण शिक्षक क्षेत्र में भी मुकाबला रोमांचक है, जहां आफाक अहमद अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। वहीं दिवंगत शिक्षक नेता केदार पांडे के परिवार की राजनीतिक सक्रियता भी इस सीट को प्रभावित कर रही है।
चुनावी समीकरण और राजनीतिक महत्व
इन आठ सीटों पर होने वाला चुनाव आम चुनावों से बिल्कुल अलग होता है। यहां जीत का आधार जनसभाएं नहीं बल्कि व्यक्तिगत संपर्क, संगठन और मतदाताओं के साथ सीधा संवाद होता है। लगभग 4.85 लाख स्नातक और 45 हजार शिक्षक मतदाता इन सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, शिक्षक और स्नातक मतदाता अपेक्षाकृत जागरूक होते हैं और वे उम्मीदवार के कामकाज और उनके व्यवहार को प्राथमिकता देते हैं।
विधान परिषद में फिलहाल एनडीए की स्थिति मजबूत है, जबकि महागठबंधन अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश में जुटा है। दोनों ही पक्ष सभी आठ सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं। इस चुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि यह मुकाबला बिहार की राजनीतिक दिशा और शिक्षित वर्ग के रुझान को स्पष्ट करेगा।
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