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झारखंड राज्यसभा नतीजों के बाद महागठबंधन में बढ़ी खटास? कांग्रेस-राजद के रिश्तों पर उठे नए सवाल

झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की चर्चाओं को फिर से तेज कर
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झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की चर्चाओं को फिर से तेज कर दिया है। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर राज्यसभा की सीट अपने नाम कर ली, जिसके बाद सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

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    चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि राजद के कुछ विधायकों ने पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं किया, जिससे कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि राष्ट्रीय जनता दल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने ही विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने में नाकाम रही।

    इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में बिहार के मार्च महीने में हुए राज्यसभा चुनाव की भी चर्चा शुरू हो गई है। उस चुनाव में राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा था और तब कांग्रेस के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठे थे। इसी वजह से अब यह चर्चा हो रही है कि क्या झारखंड के नतीजों का संबंध बिहार की उस सियासी नाराजगी से है।

    राजद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दूसरे दलों पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपने संगठन और विधायकों के समर्थन पर आत्ममंथन करना चाहिए। पार्टी ने यह भी याद दिलाया कि हाल के कई चुनावों में कांग्रेस के विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    झारखंड के चुनाव परिणाम के बाद महागठबंधन के भीतर भरोसे और तालमेल को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सहयोगी दलों के बीच इस तरह की बयानबाजी जारी रहती है तो इसका असर आने वाले चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।

    हालांकि, राजद की ओर से बिहार में मिली हार का बदला लेने जैसी किसी बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक चर्चाओं और दलों के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित है।

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