Last updated: June 20th, 2026 at 04:54 am

बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने भी इस मामले पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे हत्या जैसा मामला बताया है। उन्होंने राज्य सरकार से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करने की बात कही है।
शुक्रवार को जारी अपने बयान में अश्विनी चौबे ने कहा कि शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई यह घटना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर करती हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से भी मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
अश्विनी चौबे ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील करते हुए कहा कि अगर बिहार में सुशासन का संदेश देना है तो दोषी पुलिसकर्मियों को जल्द से जल्द जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराध के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए।
इससे पहले बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री और भाजपा नेता मिथिलेश तिवारी भी इस एनकाउंटर पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए कहा था कि पुलिस को पहले युवक के आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जांच करनी चाहिए थी और यदि कार्रवाई आवश्यक थी तो कानून के तहत अन्य विकल्प भी अपनाए जा सकते थे।
वहीं, भरत तिवारी के परिजनों ने पूरे मामले को फर्जी एनकाउंटर करार दिया है। उनका आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। घटना के दौरान भरत तिवारी कथित तौर पर फेसबुक लाइव भी कर रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उन्हें पुलिस के सामने हथियार छोड़कर सरेंडर करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज हो गई है।
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