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केंद्र सरकार के खिलाफ लद्दाख में उबाल, LAB और KDA ने 23 जून को लद्दाख बंद का किया आह्वान, सोनम वांगचुक भी शामिल

लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने 23 जून को पूरे लद्दाख में बंद का आह्वान किया
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लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने 23 जून को पूरे लद्दाख में बंद का आह्वान किया है। दोनों संगठनों ने केंद्र सरकार पर क्षेत्र की प्रमुख संवैधानिक और राजनीतिक मांगों पर देरी और अनदेखी का आरोप लगाया है।

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    संयुक्त बैठक के बाद बड़ा फैसला

    शनिवार को हुई LAB और KDA की संयुक्त कोर कमेटी बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। इस बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। बैठक के बाद नेताओं ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लोगों की मांगों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है, जिसके चलते विरोध तेज किया जा रहा है।

    क्या रहेगा बंद के दौरान

    आह्वान के अनुसार 23 जून को लद्दाख में दुकानें और अधिकतर व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहेंगी। हालांकि, आवश्यक परिवहन सेवाओं को इस बंद से बाहर रखा गया है ताकि आम जनता को गंभीर असुविधा न हो।

    प्रमुख मांगें और नाराजगी

    आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से संवैधानिक सुरक्षा, भूमि और रोजगार संरक्षण तथा स्थानीय प्रशासन में अधिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार इन मुद्दों पर लगातार देरी कर रही है और 22 मई को हुई सब-कमेटी बैठक के बाद भी कोई संतोषजनक परिणाम सामने नहीं आया।

    LAB के चेयरमैन लुकरुख शेरिंग दोरजे ने कहा कि लद्दाख के लोगों को उम्मीद थी कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाएगा, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण फैसले बंद कमरों में लिए जा रहे हैं और स्थानीय हितधारकों से पर्याप्त परामर्श नहीं किया जा रहा है।

    संवैधानिक सुरक्षा की मांग

    नेताओं ने आर्टिकल 371A, 371F और 371G जैसी संवैधानिक व्यवस्थाओं की तर्ज पर लद्दाख के लिए विशेष सुरक्षा की मांग दोहराई है, ताकि स्थानीय रोजगार और संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेताओं ने यह भी कहा कि धार्मिक या अन्य बड़े कार्यक्रमों के जरिए आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। कई वरिष्ठ नेताओं ने भी बंद के आह्वान का समर्थन किया है, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक माहौल और गरम हो गया है। अब सभी की नजरें 23 जून के प्रस्तावित बंद और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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