Last updated: June 24th, 2026 at 03:59 am

भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मृतक की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर शाहपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। दर्ज मामले में जगदीशपुर के डीएसपी राजेश कुमार, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार सहित अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस अधीक्षक राज ने मंगलवार को एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की।
हत्या और आर्म्स एक्ट समेत कई धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद मुठभेड़ को लेकर पहले से चल रही बहस और तेज हो गई है।
मां ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक की मां आशा देवी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनका बेटा भरत भूषण तिवारी बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहा था और प्रशासन तक उनकी मांगें पहुंचा रहा था। उनके अनुसार, 17 जून की सुबह पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे और भरत को बाढ़ विस्थापितों की समस्याएं दिखाने के लिए साथ ले गए।
शिकायत में कहा गया है कि जवइनिया क्षेत्र में पहुंचने के बाद भरत भूषण तिवारी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की समस्याओं को सामने रख रहे थे। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने अपने पास मौजूद हथियार नीचे रखकर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और बाद में गोली चला दी।
शाम को मिली मौत की सूचना
आशा देवी का आरोप है कि गोली लगने के बाद पुलिसकर्मी उनके बेटे को अपने वाहन से लेकर चले गए और बाद में परिवार को उसकी मौत की सूचना दी गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जांच पर टिकी निगाहें
मुठभेड़ को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठाए जा रहे थे। अब पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
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