Last updated: June 25th, 2026 at 04:51 am

बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में जांच ने नया मोड़ ले लिया है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने अदालत में लगभग 4000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें कई अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों के नाम शामिल किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी विभागों में ठेके प्राप्त करने और परियोजनाओं से जुड़े कार्यों में कथित रूप से प्रभाव, आर्थिक लेन-देन और कमीशन व्यवस्था का उपयोग किया गया। चार्जशीट में विभिन्न व्यक्तियों की भूमिका और उनसे जुड़े आरोपों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
मामले में ठेकेदार रिशु श्री पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों में ठेके हासिल करने के लिए अपने संपर्कों और प्रभाव का उपयोग किया। जांच में दावा किया गया है कि कई परियोजनाओं से जुड़े भुगतान और फाइलों के निपटारे के बदले अधिकारियों को कथित तौर पर कमीशन दिया जाता था।
चार्जशीट में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस का नाम भी शामिल किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि जल संसाधन विभाग से जुड़ी कुछ परियोजनाओं में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच के दौरान कई वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की पड़ताल की गई है।
इसके अलावा पवन कुमार और संतोष कुमार पर भी सरकारी विभागों में ठेके हासिल करने के लिए कथित रूप से अनियमित तरीकों का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन मामलों में रिश्वत और कमीशन के माध्यम से लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
मुमुक्षु चौधरी का नाम भी चार्जशीट में शामिल है। जांच के अनुसार, नगर निकायों से जुड़ी कुछ परियोजनाओं में ठेकों के आवंटन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूर्व कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने का उल्लेख भी जांच दस्तावेजों में किया गया है।
चार्जशीट में तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह के खिलाफ भी विभिन्न सरकारी निविदाओं में कथित अनियमितताओं और कमीशन लेने से जुड़े आरोप दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन सभी आरोपों की पुष्टि के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया है।
करीब 4000 पन्नों की इस चार्जशीट के सामने आने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अब अदालत में सुनवाई और आगे की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल यह मामला सरकारी ठेकों की प्रक्रिया, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
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