Human Live Media

HomeNewsएमएलसी चुनाव से पहले AIMIM की बड़ी मांग, अख्तरुल इमान ने महागठबंधन से मांगी हिस्सेदारी

एमएलसी चुनाव से पहले AIMIM की बड़ी मांग, अख्तरुल इमान ने महागठबंधन से मांगी हिस्सेदारी

बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी
newslaundry_2022-06_44d4346b-b242-4802-989d-f07ea533415a_Owaisi___Tejaswi

बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच AIMIM ने भी चुनावी समीकरणों को लेकर अपनी दावेदारी स्पष्ट कर दी है। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने कहा है कि आगामी चुनाव में उनकी पार्टी को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

Table of Contents

    अख्तरुल इमान ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान भी AIMIM ने एक सीट की मांग रखी थी। उस समय विपक्षी गठबंधन के नेताओं की ओर से भविष्य में पार्टी को सम्मानजनक भागीदारी देने का आश्वासन दिया गया था। अब एमएलसी चुनाव के अवसर पर उन्होंने उस वादे को याद दिलाते हुए कहा कि सहयोगी दलों को अपनी प्रतिबद्धता निभानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भले ही AIMIM के पास बड़ी संख्या में विधायक नहीं हैं, लेकिन कई मौकों पर उनकी पार्टी ने विपक्षी गठबंधन का समर्थन किया है। ऐसे में राजनीतिक सहयोग और आपसी विश्वास बनाए रखने के लिए पार्टी को प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।

    राबड़ी देवी के सरकारी आवास से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए अख्तरुल इमान ने कहा कि आवास आवंटन से संबंधित निर्णय कानून और नियमों के तहत होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और इससे आम जनता के जीवन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ने वाला।

    मदरसों की जांच संबंधी चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की नियमित समीक्षा और निरीक्षण होना एक सामान्य प्रक्रिया है। उनके अनुसार, यदि मदरसों की जांच की जा रही है तो स्कूलों और कॉलेजों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा कानून-व्यवस्था और त्वरित न्याय को लेकर दिए गए बयानों पर भी अख्तरुल इमान ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाया है, इसलिए सरकार को अपने दावों को जमीन पर साबित करना चाहिए।

    वहीं, हाल के दिनों में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने हरे गमछे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति किसी रंग या प्रतीक के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। उनका ध्यान राज्य के विकास, रोजगार, शिक्षा और आम लोगों की बेहतरी पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, न कि प्रतीकों को लेकर अनावश्यक बहस पर।

    Loading

    Comments are off for this post.