Last updated: October 27th, 2026 at 08:02 am

पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह से जुड़े घटनाक्रम लगातार चर्चा में हैं। जेडीयू के विधान परिषद प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध करने के बाद अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद नीलम देवी को 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से हटाया गया और सरकारी आवास खाली करने का नोटिस भी जारी हुआ। अब सबकी नजर दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है।
नीरज कुमार के विरोध से शुरू हुआ विवाद
जेडीयू ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपने मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के बजाय जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया। उन्होंने नीरज कुमार को चुनाव में हराने की बात भी कही थी।
इसके बाद जेडीयू ने 24 अक्टूबर को अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष से भी संपर्क किया है। इस पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष को करना है।
नीलम देवी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस
पार्टी से निष्कासन के बाद नीलम देवी को राज्य स्तरीय 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से भी हटा दिया गया। इस समिति में पद के कारण उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था।
इसके बाद भवन निर्माण विभाग ने पटना के मॉल रोड स्थित सरकारी आवास को खाली करने का नोटिस जारी किया। उन्हें 25 नवंबर 2026 तक बंगला खाली करने को कहा गया है। इस कार्रवाई से अनंत सिंह और उनके परिवार से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम में एक और मोड़ आ गया है।
30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
अनंत सिंह से जुड़े दुलारचंद यादव हत्याकांड में भी 30 अक्टूबर की तारीख महत्वपूर्ण है। इस दिन सुप्रीम कोर्ट में पटना हाईकोर्ट से अनंत सिंह को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।
दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह और जन सुराज प्रत्याशी के समर्थकों के बीच विवाद के बाद हिंसा हुई, जिसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई। इस मामले में अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जेल में रहते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता और 19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहा हुए।
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में जमानत रद्द कर अनंत सिंह को दोबारा जेल भेजने की मांग की गई है। जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी भी इस कानूनी लड़ाई में नीरज कुमार का समर्थन कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने हलफनामे में क्या कहा?
याचिका में बिहार सरकार को पहली और अनंत सिंह को दूसरी पार्टी बनाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया। इसमें कहा गया कि पुलिस जांच में अनंत सिंह और कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप सही पाए गए हैं।
हलफनामे के अनुसार, मामले की जांच की निगरानी एसडीपीओ और एसपी स्तर के अधिकारियों ने की। इसके बाद जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। मामले में दोष और निर्दोष होने का फैसला अदालत की सुनवाई के बाद ही होगा।
आपराधिक मामलों का भी उल्लेख
नीरज कुमार की याचिका में अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा गया है कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय इस पहलू पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। याचिका में अनंत सिंह की ओर से घोषित 67 आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है।
वहीं, राज्य सरकार के जवाबी हलफनामे में उनके खिलाफ 62 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, वसूली और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं। इन मामलों का उल्लेख अपने आप में किसी मामले में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
अब 30 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
एक तरफ अनंत सिंह और नीलम देवी को जेडीयू से निष्कासन और सरकारी आवास खाली करने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
हालांकि, राजनीतिक घटनाक्रम और आपराधिक मामले की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग हैं। अब यह देखना अहम होगा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या दलीलें सामने आती हैं और अदालत जमानत को लेकर क्या फैसला करती है।
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