Last updated: September 13th, 2026 at 02:12 pm

पटना: बिहार की सियासत में अनंत सिंह और जेडीयू नेता नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। पटना स्नातक सीट से विधान परिषद चुनाव की तैयारियों के बीच दोनों नेताओं के बीच बढ़ी दूरी ने JDU के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। इसी बीच नीरज कुमार के एक बयान ने पार्टी के बड़े नेताओं की संभावित भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
कल्याणपुर दौरे के दौरान नीरज कुमार से जब अनंत सिंह से जुड़े विवाद पर सवाल किया गया तो उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी करने के बजाय पार्टी के फैसले को सर्वोपरि बताया। नीरज ने कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं है और पार्टी जब कोई निर्णय लेगी, तो सभी को उसे स्वीकार करना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मामले पर अभी बड़े स्तर की बैठक होना बाकी है।
नीरज के बयान से क्यों बढ़ी हलचल?
नीरज कुमार के ‘बड़े स्तर की बैठक’ वाले बयान को अब राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद को लेकर पार्टी नेतृत्व आगे कोई पहल कर सकता है।
विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार की उम्मीदवारी को लेकर चर्चा तेज है। वहीं, अनंत सिंह ने नीरज के मुकाबले अनुज सिंह का समर्थन कर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
पुराने बयान से शुरू हुआ विवाद
दोनों नेताओं के बीच तनातनी की एक वजह विधानसभा चुनाव से पहले नीरज कुमार का मोकामा को लेकर दिया गया बयान भी माना जा रहा है। नीरज ने उस समय कहा था कि ‘अब मोकामा के तकदीर पर टेटन लग गया है।’ हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर अनंत सिंह का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनके बयान को अनंत सिंह से जोड़कर देखा गया।
बाद में अनंत सिंह ने विधानसभा चुनाव जीत लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में माना जाता रहा कि दोनों नेताओं के बीच तल्खी पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
JDU कार्यालय में सुलह की कोशिश भी हुई
विवाद को खत्म करने के लिए JDU कार्यालय में दोनों नेताओं को आमने-सामने लाने की कोशिश की गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में बातचीत के जरिए मामला सुलझाने का प्रयास हुआ।
बैठक के बाद नीरज कुमार ने माहौल सामान्य होने के संकेत दिए, लेकिन अनंत सिंह की ओर से इस पर कोई स्पष्ट सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इसके बाद विवाद को लेकर अटकलें और तेज हो गईं।
ललन सिंह की भूमिका पर भी निगाहें
पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की संभावित भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। ललन सिंह मोकामा और आसपास की राजनीति से परिचित माने जाते हैं और अनंत सिंह के साथ उनके राजनीतिक संबंध भी लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।
हालांकि, ललन सिंह ने अभी तक इस विवाद को लेकर कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। ऐसे में नीरज कुमार के ‘बड़े स्तर की बैठक’ वाले बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के वरिष्ठ नेता अब इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
पार्टी के फैसले पर टिका अगला कदम
अगर JDU नेतृत्व नीरज कुमार को पटना स्नातक सीट से आगे बढ़ाने का फैसला करता है, तो अनंत सिंह को साथ लाना पार्टी के लिए अहम चुनौती होगी। वहीं, अगर दोनों नेताओं के बीच विवाद जारी रहता है तो इसका असर पार्टी के अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल नीरज कुमार ने अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया है। अब निगाहें आगामी बैठक पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो सकता है कि अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद को सुलझाने के लिए JDU क्या रणनीति अपनाती है और क्या ललन सिंह इसमें कोई भूमिका निभाते हैं।
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