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अवध ओझा का बड़ा बयान: ‘देश की राजनीति का केंद्र शिक्षा और रोजगार बने, हर घर तक पहुंचे CJP का संदेश’

नई दिल्ली: मशहूर शिक्षक और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता अवध ओझा ने देश की राजनीति और जनभागीदारी
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नई दिल्ली: मशहूर शिक्षक और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता अवध ओझा ने देश की राजनीति और जनभागीदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति का मुख्य फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योग जैसे बुनियादी मुद्दों पर होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को सलाह देते हुए कहा कि पार्टी का सबसे बड़ा लक्ष्य लोगों को जागरूक बनाना होना चाहिए।

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    अवध ओझा ने कहा कि देश में चुनावी बहस अक्सर धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि असली चर्चा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार के अवसर और विकास पर होनी चाहिए। उनका मानना है कि जब जनता इन मुद्दों पर नेताओं से जवाब मांगना शुरू करेगी, तभी राजनीति की दिशा बदलेगी।

    उन्होंने बताया कि उनकी अभिजीत दीपके से भी बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने नई राजनीतिक पहल के लिए शुभकामनाएं देने के साथ कुछ सुझाव भी साझा किए। ओझा ने कहा कि किसी भी नई राजनीतिक पार्टी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह जनता के बीच जागरूकता कितनी प्रभावी तरीके से फैला पाती है।

    एक पॉडकास्ट के दौरान अवध ओझा ने देश के कई प्रमुख नेताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता की सराहना की। वहीं भाजपा के नेताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में भी कई पढ़े-लिखे और सक्षम नेता मौजूद हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर सुधांशु त्रिवेदी और संबित पात्रा का नाम लिया।

    ओझा का कहना था कि भारत में नेतृत्व की कमी नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती जागरूक मतदाता तैयार करना है। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में लोग सरकारी नीतियों, बजट और विकास से जुड़े विषयों की बजाय भावनात्मक मुद्दों पर अधिक ध्यान देते हैं। इसलिए लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जनता को विकास और जवाबदेही जैसे विषयों पर अधिक सक्रिय होना होगा।

    युवा नेतृत्व के सवाल पर अवध ओझा ने कहा कि समय के साथ राजनीति में नई सोच और नई पीढ़ी की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर की चुनौतियों को युवा बेहतर तरीके से समझते हैं। अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे क्रिकेट का प्रारूप बदल चुका है, वैसे ही राजनीति में भी समय के अनुरूप सोच और नेतृत्व की आवश्यकता है।

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