Last updated: June 19th, 2026 at 08:32 am

बिहार की राजनीति में इन दिनों पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राज्यसभा के लिए नितिन नवीन के चुने जाने के बाद इस सीट पर संभावित उपचुनाव की अटकलों के बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को लेकर सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या पीके खुद इस हाई-प्रोफाइल सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे।
बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले करीब तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। ऐसे में यदि प्रशांत किशोर यहां से चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, तो मुकाबला केवल एक उपचुनाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह बिहार की बदलती राजनीति का बड़ा संकेत भी माना जाएगा।
जन सुराज ने वर्ष 2022 में एक सामाजिक-राजनीतिक अभियान के रूप में शुरुआत की थी और बाद में इसे राजनीतिक दल का स्वरूप दिया गया। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को वोट तो मिले, लेकिन सीट हासिल नहीं हो सकी। ऐसे में बांकीपुर जैसी चर्चित सीट जन सुराज के लिए नई राजनीतिक पहचान बनाने का अवसर साबित हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर इस सीट से जीत दर्ज करते हैं तो उन्हें राज्य की राजनीति में मजबूत आधार मिलेगा और जन सुराज को नई ऊर्जा मिलेगी। वहीं, हार की स्थिति में विरोधी दल इसे उनकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि चुनावी हार किसी नेता के राजनीतिक भविष्य का अंत नहीं होती। भारतीय राजनीति में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं, जहां नेता हार के बाद और अधिक मजबूती के साथ उभरे हैं।
इसी बीच यह चर्चा भी है कि क्या विपक्षी दल बांकीपुर में कोई अलग रणनीति अपनाएंगे या मुकाबला त्रिकोणीय होगा। फिलहाल, प्रशांत किशोर चुनाव लड़ेंगे या नहीं, इस पर आधिकारिक तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि बांकीपुर का उपचुनाव बिहार की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
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