Last updated: April 19th, 2026 at 10:11 am

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि असम के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ और धमकी भरे बयान दिए। पार्टी का कहना है कि ऐसे बयान चुनाव आचार संहिता के साथ-साथ कानून के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं और इससे चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है।
वहीं, भाजपा की ओर से भी पलटवार किया गया है। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने तृणमूल नेता और राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा का आरोप है कि ब्रात्य बसु ने पुलिस और सिविक वॉलंटियरों को चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी, जो संस्थागत व्यवस्था पर सीधा हमला है।
इसी बीच, कोलकाता की मानिकतल्ला सीट से भाजपा उम्मीदवार तापस राय भी विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक आवासीय परिसर में बिना अनुमति प्रवेश कर चुनाव प्रचार किया और विरोध करने पर सुरक्षाकर्मियों को धमकाया। स्थानीय निवासियों ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। हालांकि, तापस राय ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह उनके राजनीतिक करियर को बदनाम करने की कोशिश है।
इन घटनाओं से साफ है कि बंगाल में चुनावी मुकाबला अब आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी शिकायतों तक पहुंच चुका है। ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका और भी अहम हो गई है, ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित किया जा सके।
![]()
Comments are off for this post.