Last updated: June 25th, 2026 at 02:06 pm

भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद इस मामले की जांच पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाले आयोग को सौंपी गई है। आयोग घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच करेगा।
एनकाउंटर को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन और जनआक्रोश देखने को मिल रहा है। मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी। इसी बीच भोजपुर के बिलौटी गांव में आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
महापंचायत में शामिल लोगों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है। इस दौरान लोगों ने न्यायिक जांच के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग उठाई।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विभिन्न दलों के नेताओं ने घटना को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। सत्तापक्ष की ओर से कहा गया है कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि कोई अधिकारी या कर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं विपक्षी नेताओं ने भी मामले की गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की सच्चाई सामने आ सके। कई नेताओं ने प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर जवाबदेही तय करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
इस बीच भोजपुरी अभिनेता और नेता पवन सिंह के भी पीड़ित परिवार से मुलाकात करने की खबर है। माना जा रहा है कि उनकी यह मुलाकात परिवार को सांत्वना देने और घटना के प्रति समर्थन जताने के उद्देश्य से होगी।
अब इस पूरे मामले में लोगों की नजर न्यायिक आयोग की जांच पर टिकी हुई है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि एनकाउंटर किन परिस्थितियों में हुआ और क्या प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया था। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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