Last updated: August 14th, 2026 at 03:28 pm

आरा। भोजपुर के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत के मामले में उनके परिवार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से घोषित आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी के प्रस्ताव पर फिलहाल असहमति जताई है। परिवार का कहना है कि उनकी प्राथमिकता आर्थिक मदद नहीं, बल्कि मामले में न्याय सुनिश्चित कराना है।
परिजनों ने मांग की है कि घटना के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की जाए और कानून के मुताबिक कड़ी सजा दिलाई जाए। परिवार का कहना है कि न्याय मिलने के बाद ही सरकारी नौकरी और मुआवजे के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
‘हमारी पहली मांग इंसाफ है’
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने कहा कि उनके बेटे की मौत के लिए जो भी लोग जिम्मेदार हैं, पहले उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। उन्होंने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।
आशा देवी के मुताबिक, परिवार आर्थिक सहायता या सरकारी नौकरी से पहले अपने बेटे की मौत के मामले में न्याय चाहता है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद परिवार मिलकर सरकार की ओर से की गई सहायता की घोषणा पर निर्णय लेगा।
भाभी ने भी उठाए सवाल
भरत तिवारी की भाभी सुमन तिवारी ने भी सरकार के ऐलान पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि मामले में अभी तक केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है, जबकि परिवार का आरोप है कि घटना के समय कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे। परिवार की मांग है कि मामले से जुड़े सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच हो और दोष साबित होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
सुमन तिवारी ने भरत तिवारी को शहीद का दर्जा देने और घटनास्थल पर स्मारक बनाए जाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि परिवार आर्थिक सहायता स्वीकार कर मामले को खत्म नहीं करना चाहता, बल्कि न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है। उन्होंने घटना से प्रभावित विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उचित व्यवस्था की भी मांग की।
मुख्यमंत्री ने की थी आर्थिक सहायता और नौकरी की घोषणा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए भरत तिवारी के परिवार के लिए आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया है।
न्यायिक जांच आयोग कर रहा मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार की ओर से हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। अब आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने परिवार के लिए सहायता की घोषणा की है।
भरत तिवारी की 17 जून 2026 को पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने से मौत हुई थी। घटना के बाद से परिवार लगातार मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
फिलहाल एक ओर सरकार की तरफ से परिवार को आर्थिक सहायता और रोजगार देने का ऐलान किया गया है, वहीं दूसरी ओर परिजन पहले आरोपियों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। ऐसे में मामले में न्यायिक जांच की आगे की प्रक्रिया और उसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
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