Last updated: August 6th, 2026 at 08:01 am

बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत लंबित मामलों के तेजी से निपटारे के लिए बड़ा निर्णय लिया है। राज्य कैबिनेट ने 19 जिलों में 19 अतिरिक्त विशेष न्यायालय (स्पेशल कोर्ट) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही इन न्यायालयों के संचालन के लिए 171 नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
19 जिलों में स्थापित होंगे नए विशेष न्यायालय
सरकार के फैसले के अनुसार पश्चिम चंपारण (बेतिया), मधुबनी, भोजपुर (आरा), सिवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, कैमूर (भभुआ), कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद तथा लखीसराय में नए विशेष न्यायालय स्थापित किए जाएंगे।
171 नए पदों को मिली मंजूरी
इन न्यायालयों के सुचारु संचालन के लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालयों में अराजपत्रित श्रेणी के कुल 171 नए पद सृजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाना है।
पीड़ितों को मिलेगा समय पर न्याय
राज्य सरकार का मानना है कि अतिरिक्त विशेष न्यायालय बनने से एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। इससे पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा और न्यायिक व्यवस्था अधिक जवाबदेह, संवेदनशील और प्रभावी बन सकेगी।
न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा मजबूती
सरकार का यह फैसला न्याय तक आसान और त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नए न्यायालयों और अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति से अदालतों पर बढ़ते कार्यभार को भी कम करने में मदद मिलेगी।
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