Last updated: November 1st, 2026 at 02:23 pm

बिहार में निर्दलीय विधान पार्षद राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के बीजेपी के करीब आने को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दोनों नेताओं को लेकर बीजेपी के भीतर से ही अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। पार्टी के कुछ नेता दावा कर रहे हैं कि दोनों ने सिर्फ बीजेपी को समर्थन दिया है, जबकि बिहार सरकार में बीजेपी कोटे के मंत्री लखेन्द्र पासवान का कहना है कि दोनों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है और वह इस घटनाक्रम के गवाह हैं।
इस विरोधाभास के बाद बिहार की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों निर्दलीय MLC बीजेपी में शामिल हुए हैं या केवल पार्टी को अपना समर्थन दे रहे हैं।
बीजेपी नेताओं ने बताया समर्थन, सदस्यता से किया इनकार
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित राहुल राज को लेकर बीजेपी के अरवल विधायक मनोज शर्मा ने सफाई दी है।
उन्होंने कहा कि दोनों विधान पार्षदों ने बीजेपी को समर्थन दिया है। यह समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में जताया गया है।
बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने भी पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि दोनों नवनिर्वाचित MLC बीजेपी और एनडीए की नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। उनके बयान में दोनों के औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता लेने की बात नहीं कही गई।
मंत्री लखेन्द्र पासवान ने किया अलग दावा
बीजेपी नेताओं की सफाई के बीच बिहार सरकार के मंत्री लखेन्द्र पासवान ने अलग ही दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है और वह इस पूरी प्रक्रिया के साक्षी हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव की कोशिश थी कि दोनों निर्दलीय MLC आरजेडी के साथ आ जाएं, लेकिन दोनों ने शिक्षकों के हित में सरकार के साथ रहकर काम करने का फैसला किया। उनके मुताबिक, इसी सोच के तहत दोनों ने बीजेपी की सदस्यता ली है।
पार्टी के भीतर अलग-अलग दावों से बढ़ा सियासी विवाद
एक ही घटनाक्रम पर बीजेपी के नेताओं के अलग-अलग बयान आने से राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। जहां पार्टी के विधायक और प्रवक्ता दोनों MLC के समर्थन की बात कर रहे हैं, वहीं मंत्री लखेन्द्र पासवान उनके औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल होने का दावा कर रहे हैं।
ऐसे में अब निगाहें बीजेपी के आधिकारिक रुख पर टिकी हैं। पार्टी की ओर से इस मामले में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने केवल समर्थन दिया है या वास्तव में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है।
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