Last updated: November 1st, 2026 at 02:21 pm

बिहार में दो नवनिर्वाचित निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों के बीजेपी में शामिल होने के बाद राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के बीजेपी का दामन थामने पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने कड़ी नाराजगी जताई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने दोनों नेताओं पर मतदाताओं के भरोसे के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। वहीं, राज्यसभा सांसद मनोज झा ने दोनों की विधान परिषद सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई है।
रोहिणी आचार्य ने बताया जनादेश के साथ विश्वासघात
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दोनों MLC के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे मौकापरस्ती बताते हुए लिखा कि मतदाताओं ने जिन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनकर विधान परिषद भेजा, वे जीतने के बाद सत्ता के साथ चले गए।
रोहिणी ने आरोप लगाया कि जनता ने दोनों नेताओं को बीजेपी के चुनाव चिह्न पर नहीं, बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना प्रतिनिधि चुना था। इसके बावजूद उनका बीजेपी में शामिल होना मतदाताओं के भरोसे को तोड़ने जैसा है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि निजी और राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता देकर जनादेश का अपमान किया गया है। रोहिणी ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र के साथ समझौता करार दिया।
मनोज झा ने की दोनों MLC की सदस्यता रद्द करने की मांग
RJD के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भी इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दोनों निर्दलीय MLC के बीजेपी में शामिल होने को जनादेश की चोरी बताते हुए उनकी विधान परिषद सदस्यता समाप्त करने की मांग की।
मनोज झा का कहना है कि मतदाताओं ने जिन उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुना था, उनका चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होना जनता के फैसले पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो RJD कानूनी रास्ता अपनाएगी और दोनों नेताओं की सदस्यता रद्द कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
बीजेपी में शामिल होने के बाद बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल
बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के बीजेपी में शामिल होने के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। RJD इस घटनाक्रम को मतदाताओं के जनादेश से जोड़कर सवाल उठा रही है, जबकि दोनों नेताओं के बीजेपी में जाने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल विधान परिषद की सदस्यता को लेकर है। मनोज झा की ओर से कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बाद अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
![]()
Comments are off for this post.