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देवेश कुमार के इस्तीफे से बिहार की राजनीति में हलचल, दीपक प्रकाश के एमएलसी बनने का रास्ता साफ!

पटना: बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद
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पटना: बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनका इस्तीफा विधान परिषद के सभापति को सौंपा, जिसकी पुष्टि पार्टी की ओर से भी की गई।

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    राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को एनडीए की रणनीतिक चाल माना जा रहा है। माना जा रहा है कि देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सकता है। इससे उनके मंत्री पद से जुड़े संवैधानिक सवाल का समाधान भी निकल जाएगा।

    देवेश कुमार को वर्ष 2021 में राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य बनाया गया था और उनका कार्यकाल वर्ष 2027 तक था। हालांकि, उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा देकर गठबंधन के हितों को प्राथमिकता दी है।

    दरअसल, दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार विधानसभा या विधान परिषद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। मंत्री बनने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी सदन का सदस्य नहीं बनने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में जवाब भी मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित है।

    ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा ने अपनी एमएलसी सीट सहयोगी दल के लिए छोड़कर एनडीए की एकजुटता का संदेश दिया है। पार्टी ने भी आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि देवेश कुमार का फैसला गठबंधन की मजबूती, अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व की भावना को दर्शाता है।

    अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की प्रक्रिया कब पूरी होती है। यदि ऐसा होता है तो उनका मंत्री पद सुरक्षित रहेगा और सरकार के सामने खड़ा संवैधानिक विवाद भी काफी हद तक समाप्त हो सकता है।

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