Last updated: August 26th, 2026 at 10:57 am

पटना: बिहार में छात्रों के आंदोलन को लेकर सियासी बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। इसी बीच शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदर्शन कर रहे लोगों को छात्र मानने से इनकार करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क पर आंदोलन करने वाले कुछ लोग किसी अन्य के इशारे पर काम कर रहे हैं।
मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल सभी लोग छात्र नहीं हैं और कुछ लोग किसी के ‘छतरी’ की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को देश को अस्थिर करने की कोशिश करने वाला बताते हुए छात्रों से उनसे दूरी बनाए रखने की अपील की। मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों से अपील करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई की जरूरत होती है।
स्कूलों के नाम और भगवा रंग को लेकर भी बोले मंत्री
शिक्षा मंत्री से बिहार के कुछ स्कूलों के नाम और उनके कथित भगवाकरण को लेकर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि सरकार ने 511 मॉडल स्कूल शुरू किए हैं, जिनका नाम ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ रखा गया है। उन्होंने नामकरण पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि इसमें आपत्ति की क्या बात है।
मिथिलेश तिवारी ने भगवा रंग का जिक्र करते हुए कहा कि सूर्य का रंग भी भगवा माना जाता है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में स्कूलों के नाम और रंग को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है।
BPSC अधिकारी के बयान के बाद फिर विवाद
छात्रों को लेकर शिक्षा मंत्री का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की एक टिप्पणी पर भी विवाद हुआ था। गर्दनीबाग में चल रहे छात्र आंदोलन के संदर्भ में उन्होंने एक कहावत का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणी की थी।
इस बयान के बाद छात्रों और विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा नियंत्रक को निलंबित कर दिया था। अब शिक्षा मंत्री की टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार का रुख क्या है और क्या इस बयान पर भी कोई कार्रवाई होगी।
पटना में जारी है छात्रों का आंदोलन
BPSC परीक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर पटना में छात्र कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान से मार्च निकालकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की थी। रास्ते में पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी।
डाकबंगला चौराहे के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान कुछ छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई।
छात्रों के आंदोलन और प्रशासन की कार्रवाई के बीच अब नेताओं के बयानों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। शिक्षा मंत्री की ताजा टिप्पणी के बाद विपक्ष की प्रतिक्रिया और सरकार की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।
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