Last updated: June 5th, 2026 at 03:28 pm

बिहार सरकार ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा और अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गैर मजरूआ आम भूमि की पहचान कर उसे तत्काल सरकारी रोक सूची में शामिल किया जाए, ताकि ऐसी जमीनों का किसी भी प्रकार का अवैध हस्तांतरण रोका जा सके।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि राज्य की महत्वपूर्ण संपत्ति है और इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं के लिए तैयार किए जा रहे लैंड बैंक को मजबूत बनाने हेतु सरकारी जमीनों को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है।
विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन मामलों में जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया चल रही है, उन्हें भी रोक सूची में शामिल किया जाए। संबंधित जमीनों का पूरा विवरण निबंधन विभाग को उपलब्ध कराया जाएगा ताकि ऐसी भूमि की खरीद-बिक्री को पूरी तरह रोका जा सके।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सरकारी जमीनों की सूची का सत्यापन कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया। इसके साथ ही अधिकारियों से शपथ पत्र भी लिया जाएगा कि उनके क्षेत्र की कोई भी सरकारी भूमि सूची से बाहर नहीं रह गई है।
बैठक के दौरान दाखिल-खारिज, ऑनलाइन म्यूटेशन, ई-मापी, परिमार्जन, लोक शिकायत और राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने साफ कहा कि विभाग की सभी सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जा रही हैं। यदि कोई अधिकारी ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
ई-मापी कार्यों में धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताई गई। अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य पूरा करने और लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मामलों के निष्पादन में ‘फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट’ प्रणाली का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि विभागीय कार्यों की निगरानी लगातार की जा रही है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी कर्मियों को नियमों के अनुसार कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में प्रदर्शन में सुधार नहीं दिखा तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से सरकारी जमीनों की सुरक्षा मजबूत होगी और भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाले भूमि विवादों पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
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