Last updated: July 4th, 2026 at 03:43 am

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सुरक्षा, प्रशासनिक और विकासात्मक मुद्दों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सीमावर्ती सात जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
बैठक के दौरान भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था, सीमा प्रबंधन, अतिक्रमण, साइबर अपराध, नागरिकता संबंधी मामलों, आधारभूत संरचना और लंबित परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों जैसे एसएसबी, आईबी, ईडी, एनसीबी, कस्टम्स और आयकर विभाग के अधिकारियों ने भी अपने सुझाव और कार्रवाई की जानकारी साझा की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भारत-नेपाल सीमा पर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, तस्करी या संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करें और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएं।
उन्होंने बताया कि बिहार की भारत-नेपाल सीमा लगभग 735 किलोमीटर लंबी है, जहां सात जिले, 70 पुलिस थाने और एसएसबी की 194 सीमा चौकियां (BOP) कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने सभी थाना प्रभारियों को सतर्क रहते हुए सीमा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रत्येक चेकपोस्ट से 15 किलोमीटर के दायरे में प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में उर्वरक और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के बीच नियमित समन्वय बैठक आयोजित करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही सीमावर्ती जिलों में ऐसे लोगों की पहचान करने के निर्देश दिए गए, जिनकी आय में अचानक असामान्य वृद्धि हुई हो, ताकि आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने किशनगंज जिले में उर्दू विद्यालयों की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
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