Last updated: September 10th, 2026 at 10:38 am

पटना: पटना के ज्ञान भवन में आयोजित रोजगार मेले से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी में बदल गया है। रोजगार मेले में चयनित एक महिला अभ्यर्थी ने अपने बारे में प्रकाशित खबरों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी अनुमति के बिना वीडियो बनाया गया और उनकी बातों को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किया गया। महिला का कहना है कि इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
महिला अभ्यर्थी के बयान के बाद बिहार में सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी RJD के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है।
BJP ने तेजस्वी यादव पर साधा निशाना
बिहार BJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महिला अभ्यर्थी के बयान का हवाला देते हुए RJD और तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि महिला खुद सामने आकर अपनी बात रख चुकी हैं और संवेदनशील मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की गई।
BJP का आरोप है कि महिला ने यौन शोषण की शिकायत नहीं की थी, बल्कि उनकी शिकायत को अलग संदर्भ में पेश किया गया। पार्टी ने महिला की बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने को शर्मनाक बताया।
तेजस्वी यादव ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रोजगार मेले में चयनित एक महिला को ICU नर्स की नौकरी के नाम पर ऐसी जगह भेजा गया, जहां उससे कथित तौर पर देह व्यापार कराने की कोशिश की गई।
इस रिपोर्ट के आधार पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बिहार सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी कंपनियों के जरिए युवाओं को गलत कामों में धकेले जाने का खतरा है और सरकार को इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
तेजस्वी यादव ने बिहार में कथित अपराध और भर्ती नेटवर्क को लेकर भी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, उनके इन आरोपों पर BJP ने महिला अभ्यर्थी के बयान को आधार बनाकर पलटवार किया है।
RJD ने भी मुख्यमंत्री से मांगा जवाब
RJD ने भी अपने आधिकारिक X हैंडल से रोजगार मेले में बांटे गए नियुक्ति पत्रों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि अगर किसी फर्जी कंपनी के जरिए अभ्यर्थियों को गलत काम में धकेलने की कोशिश हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की है। RJD ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से जवाब मांगा।
सरकार ने बनाई जांच टीम
विवाद बढ़ने के बाद बिहार सरकार के युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की। जांच टीम ने संबंधित महिला अभ्यर्थी से मुलाकात कर उनका पक्ष जाना। विभाग के मुताबिक, महिला ने रोजगार मेले में पंजीकरण कराया था। उनकी नर्सिंग योग्यता के आधार पर एक कंपनी ने उन्हें ICU नर्सिंग स्टाफ के पद के लिए चयनित किया और नियुक्ति पत्र दिया।
महिला के अनुसार, नियुक्ति के बाद जब वह कार्यस्थल पर पहुंचीं तो उन्हें 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम करने के लिए कहा गया। उनके पति भी उनके साथ दिल्ली गए थे। मरीजों की देखभाल और रहने-खाने की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं होने के बाद दोनों ने वहां से बिहार लौटने का फैसला किया।
अब जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि रोजगार मेले में कंपनी का चयन कैसे हुआ, महिला को किस तरह की नौकरी की पेशकश की गई और मीडिया में सामने आए गंभीर आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है।
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