Last updated: April 22nd, 2026 at 09:28 am

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद से ही राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक Mukesh Sahni ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल का ध्यान केवल सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने पर है, जबकि राज्य के विकास को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सहनी ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद से राज्य में विकास कार्य लगभग ठप पड़ गए हैं। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान संसाधनों का अत्यधिक उपयोग किया गया, लेकिन सरकार बनने के बाद प्रशासनिक गति धीमी हो गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मंत्रिमंडल विस्तार में देरी क्यों की जा रही है, जबकि विभागों का काम प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि चुनावी रणनीतियों के बजाय देश और राज्यों के विकास पर समान ध्यान दिया जाए, तो स्थिति बेहतर हो सकती है।
महिला आरक्षण को लेकर भी सहनी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि महिला आरक्षण बिल को लेकर जो दावे किए गए थे, वे जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने इसे परिसीमन से जोड़कर देखा और कहा कि महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण पर काम नहीं हो रहा।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी सरकार को “दिशाहीन” करार दिया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि यह सत्ता परिवर्तन पहले से तय रणनीति का हिस्सा था। उनका आरोप है कि भाजपा के पास बिहार के विकास के लिए कोई ठोस नीति नहीं है और सरकार स्थिर भी नहीं दिख रही।
RJD ने मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के भीतर ही उन्हें पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है। विपक्ष का दावा है कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति राज्य में अस्थिरता पैदा कर सकती है।
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जहां विपक्ष सरकार की नीतियों और निर्णयों पर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तापक्ष इन आरोपों का जवाब देने में जुटा है।
![]()
Comments are off for this post.