Last updated: August 18th, 2026 at 09:51 am

बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान हुई AK-47 फायरिंग को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। सरकार ने अदालत में दाखिल जवाबी हलफनामे में पुलिस पर लगाए गए अत्यधिक बल प्रयोग और बर्बर कार्रवाई के आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने परिस्थिति के मुताबिक कदम उठाए थे।
फायरिंग की घटना पर सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार के जवाब के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान AK-47 से चार राउंड फायर किए गए थे। घटना के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि AK-47 पुलिस का प्लाटून स्तर का हथियार है, जिसका इस्तेमाल सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए।
पुलिसकर्मी पर कार्रवाई, आगे के लिए जारी हुए निर्देश
घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस विभाग की ओर से संबंधित कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही पुलिस महानिदेशक की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य भविष्य में कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों में ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप से सरकार का इनकार
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बिहार सरकार ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा ताकत इस्तेमाल किए जाने के आरोपों को स्वीकार नहीं किया। सरकार का पक्ष है कि उस समय मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस की कार्रवाई की गई और इसे असंगत बल प्रयोग नहीं माना जा सकता।
छात्र प्रदर्शन से जुड़ा यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है। एक तरफ पुलिस कार्रवाई और AK-47 के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं राज्य सरकार ने अपने जवाब में कार्रवाई का बचाव करते हुए संबंधित पुलिसकर्मी पर हुई विभागीय कार्रवाई और भविष्य के लिए जारी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है।
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