Last updated: August 17th, 2026 at 05:10 pm

पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार के बैनर तले छात्र और शोधार्थी पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। अब पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ ने भी आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है।
70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग 70वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना है। इसके साथ ही बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में UGC Regulation 2018 के तहत Table 3A लागू करने और राज्य में स्थायी डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग भी उठाई जा रही है।
आंदोलनकारी छात्रों और शोधार्थियों का कहना है कि भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। उनका दावा है कि मौजूदा व्यवस्था से बिहार के स्थानीय अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
PU छात्रसंघ अध्यक्ष ने आंदोलन में लिया हिस्सा
आंदोलन के दौरान पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष शांतनु शेखर गर्दनीबाग पहुंचे और अनशन कर रहे छात्रों के साथ धरने में शामिल हुए। उन्होंने आंदोलनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की।
शांतनु शेखर ने कहा कि अगर छात्रों और शोधार्थियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने आगे ‘बिहार बंद’ जैसे बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी।
शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग
छात्रसंघ अध्यक्ष ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष चयन प्रक्रिया और अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
आंदोलनकारियों ने उच्च शिक्षा में नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने और बिहार में डोमिसाइल नीति को लेकर भी सरकार से स्पष्ट कदम उठाने की मांग की है।
अन्य छात्र आंदोलन को भी समर्थन
इसी बीच शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर एक अन्य युवा के आमरण अनशन को भी पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ और PhD धारकों एवं शोधार्थियों ने समर्थन देने की बात कही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय आने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। अब निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं।
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