Last updated: June 7th, 2026 at 05:31 pm

वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में BRICS समूह का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह मंच अब कई नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद और अधिक प्रभावशाली बन गया है। इसी बीच रूस ने BRICS में भारत की भूमिका की खुलकर सराहना करते हुए उसे संगठन का प्रमुख और विश्वसनीय साझेदार बताया है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में दिए गए एक बयान में कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक दक्षिण के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि BRICS के भीतर भारत की आर्थिक शक्ति, तकनीकी प्रगति और कूटनीतिक संतुलन संगठन को नई दिशा देने में मदद कर रहे हैं। रूस ने यह भी कहा कि भारत के साथ सहयोग BRICS की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति काफी मजबूत की है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक नीति निर्माण में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला देश बनकर उभर रहा है। BRICS में उसकी सक्रिय भागीदारी इसी बदलाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।
भारत लगातार बहुपक्षीय सहयोग, आर्थिक विकास, डिजिटल नवाचार, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक व्यापार सुधार जैसे विषयों पर अपनी मजबूत राय रखता रहा है। BRICS मंच के माध्यम से भारत विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है। यही कारण है कि संगठन के भीतर भारत की भूमिका को लगातार महत्व मिल रहा है।
आर्थिक दृष्टि से भी भारत BRICS के सबसे महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक माना जाता है। देश की मजबूत विकास दर, बढ़ता उपभोक्ता बाजार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तेजी से विकसित हो रहा तकनीकी क्षेत्र वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत BRICS की आर्थिक दिशा तय करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहेगा।
भारत वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता भी कर रहा है। इस दौरान भारत ने खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार, डिजिटल सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों को प्राथमिकता देने की बात कही है। भारतीय नेतृत्व का मानना है कि BRICS केवल आर्थिक मंच नहीं बल्कि विकासशील देशों के लिए सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
रूस की ओर से मिली सराहना को भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है और रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष तथा व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। BRICS के भीतर भी दोनों देश कई मुद्दों पर समान दृष्टिकोण रखते हैं।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि BRICS के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। सदस्य देशों के अलग-अलग हित, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक प्रतिस्पर्धा संगठन की एकजुटता को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद भारत लगातार संवाद और सहयोग के माध्यम से संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए भारत एक महत्वपूर्ण आवाज बनकर उभरा है। विकास, तकनीक, वित्तीय सहयोग और जलवायु न्याय जैसे विषयों पर भारत की सक्रिय भूमिका ने उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विशेष पहचान दिलाई है। BRICS में उसकी बढ़ती भूमिका भी इसी व्यापक परिवर्तन का हिस्सा मानी जा रही है।
फिलहाल रूस की ओर से मिली प्रशंसा ने एक बार फिर भारत की वैश्विक भूमिका को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। BRICS के भीतर भारत की बढ़ती सक्रियता और नेतृत्व क्षमता यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
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