Last updated: September 24th, 2026 at 09:19 am

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बाद राजनीतिक बहस तेज है। विपक्षी नेताओं की ओर से उनके इस्तीफे से लेकर गिरफ्तारी तक की मांगें सामने आई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या पुलिस किसी मौजूदा चीफ इलेक्शन कमिश्नर को गिरफ्तार कर सकती है और संविधान व कानून उन्हें किस तरह की सुरक्षा देता है?
इसका जवाब समझने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 और संविधान के अनुच्छेद 324 को देखना जरूरी है।
धारा 16 में चुनाव आयुक्तों को क्या सुरक्षा मिली है?
2023 के कानून की धारा 16 मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कामकाज से जुड़े मामलों में विशेष कानूनी संरक्षण देती है। कानून के मुताबिक, किसी मौजूदा या पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त अथवा चुनाव आयुक्त के खिलाफ उस काम, कार्यवाही या बयान को लेकर दीवानी या आपराधिक कार्यवाही स्वीकार या जारी नहीं रखी जा सकती, जो उन्होंने अपने आधिकारिक कर्तव्य निभाते हुए या ऐसा करने का दावा करते हुए किया हो।
इसका मतलब यह है कि चुनाव आयोग की आधिकारिक जिम्मेदारियों के दौरान लिए गए फैसलों और दिए गए बयानों पर इस धारा में निर्धारित सुरक्षा लागू होती है। यह प्रावधान पद छोड़ने के बाद भी संबंधित आधिकारिक आचरण के लिए सुरक्षा प्रदान करता है।
क्या आधिकारिक फैसलों के लिए CEC को गिरफ्तार किया जा सकता है?
अगर मामला सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े किसी काम का है और वह धारा 16 के दायरे में आता है, तो उस आधार पर सामान्य आपराधिक कार्यवाही शुरू करने पर कानून में रोक है। इसलिए ऐसे संरक्षित आधिकारिक कृत्य के आधार पर गिरफ्तारी का सवाल भी उसी कानूनी सुरक्षा के संदर्भ में देखा जाएगा।
हालांकि, इस सुरक्षा को हर तरह के व्यक्तिगत अपराध के लिए पूर्ण छूट के तौर पर नहीं समझा जा सकता। यदि किसी व्यक्ति पर उसके आधिकारिक चुनावी कर्तव्यों से अलग निजी आपराधिक कृत्य का आरोप हो, तो उसकी कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। किसी खास मामले में गिरफ्तारी या जांच की वैधता तथ्यों और लागू कानूनों पर निर्भर करेगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को सरकार या पुलिस सीधे पद से नहीं हटा सकती। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
इस प्रक्रिया में संसद की भूमिका होती है। यानी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना सामान्य प्रशासनिक आदेश के जरिए संभव नहीं है। यह संवैधानिक रूप से निर्धारित विशेष प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है।
क्या इसका मतलब CEC को किसी भी अपराध में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता?
नहीं। धारा 16 की सुरक्षा आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े कृत्यों तक सीमित है। कानून का पाठ मौजूदा और पूर्व चुनाव आयुक्तों को उस कार्य, बात या बयान के संबंध में सुरक्षा देता है जो आधिकारिक ड्यूटी निभाते हुए किया गया हो।
इसलिए आधिकारिक चुनावी फैसले और किसी व्यक्ति की निजी हैसियत में किए गए कथित अपराध के बीच कानूनी अंतर है। उदाहरण के तौर पर, किसी निजी आपराधिक कृत्य को सिर्फ इसलिए आधिकारिक कार्य नहीं माना जा सकता क्योंकि आरोपी व्यक्ति उस समय चुनाव आयुक्त के पद पर है। ऐसे मामले में लागू आपराधिक कानून और अन्य कानूनी प्रावधान अलग से देखे जाएंगे।
कुल मिलाकर, CEC को आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े कार्यों के लिए 2023 के कानून में विशेष सुरक्षा मिली है, जबकि पद से हटाने के लिए संविधान ने अलग और कड़ी प्रक्रिया निर्धारित की है।
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