Last updated: October 9th, 2026 at 03:07 pm

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने SIR के बाद हुए सभी चुनाव रद्द करने, पूरे मामले की न्यायिक निगरानी में जांच कराने और ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। चंद्रशेखर ने कहा कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही तय करना जरूरी है।
चंद्रशेखर आजाद के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, मतदाताओं के डेटा के केंद्रीकरण तथा चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों में उठे सवालों ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा किया है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की।
सांसद ने 26 सितंबर 2026 को निर्वाचन आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति और 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस मामले में आयोग के दावों और अदालत की स्थिति के बीच स्पष्टता जरूरी है। हालांकि, इन घटनाक्रमों और कानूनी दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
चंद्रशेखर आजाद ने मांग की कि SIR के बाद हुए चुनावों को रद्द करने के मुद्दे पर विचार किया जाए और पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की बात कही।
उन्होंने वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून में किए गए बदलावों को वापस लेने की भी मांग की। चंद्रशेखर के अनुसार, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह का सवाल न उठे।
इसके अलावा, उन्होंने ईवीएम से मतदान कराने की व्यवस्था समाप्त कर बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की वकालत की। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
चंद्रशेखर आजाद की इन मांगों से मतदाता सूची के पुनरीक्षण, निर्वाचन आयोग की जवाबदेही और चुनाव कराने की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
![]()
Comments are off for this post.