Last updated: October 24th, 2026 at 12:38 pm

आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने पांच राज्यों में चुनावी वॉर रूम के अध्यक्षों की नियुक्ति की है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के लिए नियुक्तियों को मंजूरी दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, इन नेताओं को चुनावी रणनीति और संगठन से जुड़े कामकाज के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
कांग्रेस की इस सूची में पूर्व IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन का नाम भी शामिल है। उन्हें पंजाब में चुनावी वॉर रूम का अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी इन नियुक्तियों के जरिए संबंधित राज्यों में चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक गतिविधियों के प्रबंधन पर ध्यान दे रही है।
पांच राज्यों में किसे मिली जिम्मेदारी?
कांग्रेस की ओर से घोषित नियुक्तियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सचिन यादव को चुनावी वॉर रूम का अध्यक्ष बनाया गया है। पंजाब में पूर्व IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन को यह जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, गोवा में इमरोज खान, मणिपुर में बिस्वरंजन मोहंती और उत्तराखंड में कृष्ण सतरौड़ को वॉर रूम की कमान सौंपी गई है।
इन नियुक्तियों के बाद पांचों राज्यों में चुनाव से संबंधित गतिविधियों के संचालन और पार्टी के अलग-अलग स्तरों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संबंधित वॉर रूम अध्यक्षों की होगी।
क्या होता है चुनावी वॉर रूम का काम?
चुनावी वॉर रूम किसी भी राजनीतिक दल की चुनावी तैयारियों का एक अहम हिस्सा होता है। इसका काम चुनाव से जुड़ी गतिविधियों की योजना बनाना, प्रचार अभियान का समन्वय करना और नेताओं, पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाए रखना होता है।
इसके अलावा चुनावी मुद्दों से जुड़ी जानकारी जुटाना, प्रचार की रणनीति तैयार करने में सहयोग देना और संगठन की गतिविधियों की निगरानी करना भी वॉर रूम की जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है। इसके जरिए पार्टी अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर अपनी चुनावी तैयारियों का प्रबंधन करती है।
विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी कांग्रेस
पांच राज्यों में वॉर रूम अध्यक्षों की नियुक्ति को कांग्रेस की संगठनात्मक और चुनावी तैयारियों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी इन राज्यों में चुनाव से जुड़ी गतिविधियों के बेहतर समन्वय और प्रचार अभियान के प्रबंधन पर ध्यान दे रही है।
नई नियुक्तियों के जरिए चुनावी रणनीति, संगठनात्मक कामकाज और जमीनी स्तर से मिलने वाली जानकारी के बीच तालमेल बनाने की जिम्मेदारी तय की गई है। हालांकि, इन वॉर रूम के तहत आगे कौन-कौन सी विशेष रणनीतियां लागू की जाएंगी, इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
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