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साईं बाबा से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट पर दिल्ली HC सख्त, GAC को 7 दिन में फैसला देने का निर्देश

शिर्डी स्थित श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने शिकायत अपीलीय समिति (GAC)
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शिर्डी स्थित श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने शिकायत अपीलीय समिति (GAC) को अहम निर्देश दिया है। अदालत ने समिति से कहा है कि ट्रस्ट की अपील पर सात दिनों के भीतर विचार कर कारणों के साथ अपना फैसला जारी किया जाए।

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    मामला YouTube और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऐसी सामग्री से संबंधित है, जिसे ट्रस्ट ने साईं बाबा और संस्थान के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक, मानहानिपूर्ण और धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने वाला बताया है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित वीडियो की सामग्री को अपने आदेश में दोहराने से परहेज किया।

    ट्रस्ट ने ऑनलाइन वीडियो हटाने की मांग की

    ट्रस्ट का आरोप है कि कुछ YouTube वीडियो में साईं बाबा और ट्रस्ट को लेकर ऐसे दावे किए गए हैं, जिन्हें वह तथ्यहीन और अपमानजनक मानता है। ट्रस्ट के अनुसार, इन वीडियो के ऑनलाइन उपलब्ध रहने से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    इसी आधार पर ट्रस्ट ने संबंधित सामग्री को हटाने या उसकी ऑनलाइन पहुंच रोकने की मांग की है। साथ ही Google LLC और YouTube की ओर से वीडियो हटाने के अनुरोधों को अस्वीकार किए जाने वाले संचार को भी चुनौती दी गई है।

    Google और YouTube के जवाबों को दी गई चुनौती

    ट्रस्ट ने 17, 18, 19, 24 और 26 जुलाई 2026 को Google LLC/YouTube की ओर से दिए गए जवाबों को अदालत के समक्ष चुनौती दी। ट्रस्ट का कहना है कि उसने संबंधित सामग्री के URL और जरूरी जानकारी उपलब्ध कराते हुए प्लेटफॉर्म के शिकायत तंत्र के जरिए कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन उसकी शिकायतों पर अपेक्षित कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद ट्रस्ट ने केंद्र सरकार और GAC के समक्ष भी मामला उठाया। राहत नहीं मिलने पर उसने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ में हुई सुनवाई

    मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने हुई। अदालत ने मामले की प्रकृति को देखते हुए GAC को निर्देश दिया कि वह ट्रस्ट की अपील पर जल्द निर्णय ले।

    हाई कोर्ट ने समिति को सात दिनों के भीतर तर्कपूर्ण और कारणयुक्त आदेश पारित करने को कहा है। साथ ही ट्रस्ट को फैसले की जानकारी देने और अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को निर्धारित है।

    ट्रस्ट ने शिकायत व्यवस्था में बदलाव की भी मांग की

    ट्रस्ट ने केंद्र सरकार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के समक्ष भी हस्तक्षेप की मांग रखी है। उसकी दलील है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

    ट्रस्ट ने शिकायतों के साथ ज्यादा दस्तावेज और साक्ष्य अपलोड करने की सुविधा देने तथा शिकायत विवरण की कैरेक्टर लिमिट जैसी पाबंदियों में बदलाव की मांग भी की है।

    फिलहाल हाई कोर्ट ने ऑनलाइन सामग्री को हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने मुख्य रूप से GAC को ट्रस्ट की अपील पर तय समयसीमा में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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