Last updated: October 17th, 2026 at 07:26 am

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च और छात्र संगठनों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस में मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी और आसपास के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे। आरोप है कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी वहां एकत्र हुए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
शुक्रवार शाम मध्य दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर CJP समर्थकों और छात्र संगठनों के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लेकर ‘जय हिंद’ के नारे लगाते दिखाई दिए।
CJP संस्थापक समेत करीब 150 लोग हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है।
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शन को लेकर आरोप लगाया गया कि युवाओं का इस्तेमाल कर अराजकता फैलाने और सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है। इस मुद्दे पर विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
मंडी हाउस में छात्रों ने उठाईं कई मांगें
दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में AISA, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अन्य छात्र संगठनों के सदस्यों ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को रद्द करने की मांग की।
इस मार्च में सांसद जॉन ब्रिटास और संतोष कुमार सहित वामपंथी नेताओं ने डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के साथ हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस और प्रदर्शन में शामिल लोगों के बीच मामूली झड़पें होने की जानकारी सामने आई।
पत्रकारों के साथ भी धक्का-मुक्की की जानकारी
प्रदर्शन को कवर करने के लिए पत्रकारों और स्वतंत्र यूट्यूब रिपोर्टरों की मौजूदगी भी रही। इस दौरान कुछ स्वतंत्र पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और हूटिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
तिरंगा मार्च पर रोक, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जहां पुलिस ने प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई की बात कही है, वहीं विपक्षी दलों ने हिरासत को लेकर सवाल उठाए हैं।
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