Last updated: August 22nd, 2026 at 11:57 am

नई दिल्ली: राजधानी में औद्योगिक प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने निगरानी और कार्रवाई बढ़ा दी है। सरकार के मुताबिक जनवरी से जुलाई 2026 के बीच कुल 2,011 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान कई इकाइयों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले सामने आए।
106 इकाइयां मानकों पर खरी नहीं उतरीं
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार निरीक्षण में 106 औद्योगिक इकाइयां निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करती नहीं मिलीं। वहीं, 78 इकाइयां वैध Consent to Operate (CTO) के बिना संचालित पाई गईं।
सरकार की ओर से बताया गया कि कार्रवाई के तहत 44 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, जबकि नियमों का पालन नहीं करने वाली 33 इकाइयों के खिलाफ क्लोजर ऑर्डर जारी किए गए।
प्रदूषण के दूसरे स्रोतों पर भी निगरानी
दिल्ली सरकार का अभियान केवल औद्योगिक इकाइयों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों को सड़क की धूल, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल तथा खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि प्रदूषण के स्रोतों की नियमित निगरानी के साथ नियमों का उल्लंघन मिलने पर समय पर कार्रवाई की जाएगी।
नियम मानने वाले उद्योगों को सहयोग, उल्लंघन पर सख्ती
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पर्यावरणीय नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को सरकार का सहयोग मिलेगा, लेकिन राजधानी की हवा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण को केवल सरकारी जिम्मेदारी मानने के बजाय नागरिकों की भागीदारी को भी जरूरी बताया। सरकार की अपील है कि लोग प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाएं, ताकि शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की जा सके।
Green Delhi और MCD 311 से कर सकते हैं शिकायत
दिल्ली में नागरिक प्रदूषण से संबंधित शिकायतें Green Delhi App और MCD 311 App के जरिए दर्ज करा सकते हैं। सरकार के मुताबिक, नागरिकों से मिलने वाली सूचनाएं प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और कार्रवाई में मददगार हो सकती हैं।
दिल्ली सरकार का कहना है कि आने वाले समय में निरीक्षण, तकनीक आधारित निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। लक्ष्य राजधानी में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण बढ़ाना और लोगों को बेहतर वायु गुणवत्ता उपलब्ध कराना है।
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