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पूर्व IPS किरण बेदी ने प्रदर्शन प्रबंधन पर उठाए सवाल, कहा- सिविल पुलिस को मिलनी चाहिए पहली जिम्मेदारी

नई दिल्ली: हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर चल रही बहस के बीच देश
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नई दिल्ली: हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर चल रही बहस के बीच देश की पहली महिला IPS अधिकारी रहीं किरण बेदी ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र आंदोलन या विरोध प्रदर्शन के दौरान सीधे सशस्त्र बलों को सामने लाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले चरण में सिविल पुलिस और सिविल डिफेंस की भूमिका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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    किरण बेदी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था काफी हद तक ब्रिटिश दौर की सोच पर आधारित है, जहां हर बड़े प्रदर्शन में तुरंत बल प्रयोग की स्थिति बन जाती है। उनका मानना है कि इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है ताकि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की स्थिति कम हो सके।

    उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले प्रशिक्षित सिविल डिफेंस कर्मियों को तैनात किया जाए। यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है तो दूसरे चरण में महिला पुलिस बल को लगाया जा सकता है। उनके मुताबिक, महिला पुलिस बिना लाठी के भी भीड़ को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

    पूर्व IPS अधिकारी ने कहा कि यदि इसके बाद भी हालात बिगड़ते हैं, तभी अंतिम विकल्प के रूप में सशस्त्र पुलिस या अन्य सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में वाटर कैनन, आंसू गैस और अन्य गैर-घातक उपायों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए तथा पूरी कार्रवाई की ड्रोन और कैमरों से निगरानी होनी चाहिए ताकि किसी भी घटना की निष्पक्ष जांच संभव हो सके।

    किरण बेदी ने प्रदर्शन स्थलों को लेकर भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि संसद भवन जैसे संवेदनशील इलाकों की बजाय बड़े और निर्धारित स्थानों, जैसे रामलीला मैदान, में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाने चाहिए। इससे सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनी रहेगी और आम नागरिकों के दैनिक जीवन तथा व्यापार पर भी कम असर पड़ेगा।

    उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जिसमें संवाद, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे।

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