Last updated: August 20th, 2026 at 05:15 pm
बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चा शुरू हो गई है। जेडीयू के पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हैं। गुरुवार को पटना में उनके कांग्रेस में शामिल होने से जुड़े मिलन समारोह के पोस्टर दिखाई देने के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है।
गोपाल मंडल भागलपुर जिले की गोपालपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं। लंबे समय तक जेडीयू से जुड़े रहने के कारण भागलपुर और नवगछिया इलाके में उनकी मजबूत राजनीतिक पहचान रही है।
जेडीयू से अलग होकर लड़ा था चुनाव
2025 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने गोपाल मंडल को टिकट नहीं दिया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि, चुनावी मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव परिणाम के बाद से ही गोपाल मंडल के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। अब कांग्रेस के साथ उनके संभावित जुड़ाव की खबर ने भागलपुर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
चार बार विधायक रह चुके हैं गोपाल मंडल
गोपाल मंडल लंबे समय से भागलपुर की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक चुने जाने के कारण इलाके में उनका अपना राजनीतिक आधार माना जाता है।
जेडीयू से टिकट कटने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ना उनके लिए बड़ा राजनीतिक दांव था, लेकिन वह विधानसभा में वापसी नहीं कर सके। अब कांग्रेस में संभावित प्रवेश को उनकी राजनीतिक पारी को नए सिरे से शुरू करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस में आने से क्या बदलेगा राजनीतिक समीकरण?
अगर गोपाल मंडल आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल होते हैं, तो इसका असर भागलपुर और नवगछिया क्षेत्र की राजनीति पर पड़ सकता है। कांग्रेस को इस इलाके में लंबे समय तक चुनावी राजनीति कर चुके एक अनुभवी चेहरे का साथ मिल सकता है।
दूसरी ओर, गोपाल मंडल के लिए कांग्रेस एक नया राजनीतिक मंच साबित हो सकती है। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के बाद संगठन के साथ तालमेल और उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर कई सवाल भी होंगे।
बेबाक बयानों के लिए भी चर्चा में रहते हैं
गोपाल मंडल अपनी बेबाक शैली और अलग अंदाज के लिए बिहार की राजनीति में जाने जाते हैं। उनके बयान कई बार राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया चर्चा का हिस्सा बन चुके हैं। यही वजह है कि उनके किसी भी बड़े राजनीतिक फैसले पर समर्थकों के साथ-साथ विरोधी दलों की भी नजर रहती है।
फिलहाल कांग्रेस में उनके शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि वह कांग्रेस का दामन थामते हैं, तो भागलपुर और नवगछिया की राजनीति में इसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।
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