Last updated: October 18th, 2026 at 01:59 pm

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद मृतकों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। रविवार, 18 अक्टूबर की सुबह परिजनों ने अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर हंगामा किया और जिला प्रशासन व पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। देर रात पहाड़ी पर एक ट्रक के अनियंत्रित होने से हुए इस हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है, जबकि 25 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों का आरोप है कि उन्हें समय पर सही जानकारी नहीं दी गई। कई परिजनों का कहना है कि रातभर उन्हें बताया जाता रहा कि उनके बच्चे का इलाज चल रहा है, लेकिन बाद में उन्हें उसकी मौत की जानकारी मिली। इस मामले को लेकर अस्पताल परिसर में शोक और आक्रोश का माहौल रहा।
‘हादसा दो बजे हुआ, तो अस्पताल चार बजे क्यों पहुंचाया?’
एक मृतक के परिजन ने सवाल उठाया कि अगर हादसा रात दो बजे हुआ था, तो घायल को अस्पताल पहुंचाने में दो घंटे की देरी क्यों हुई? उनका आरोप है कि समय पर इलाज मिलता तो शायद उनके बच्चे की जान बच सकती थी। परिजनों के मुताबिक, रात दो बजे तक उन्हें इलाज जारी होने की जानकारी दी जाती रही और वे सुबह चार बजे तक अस्पताल में इंतजार करते रहे।
परिवारों का यह भी आरोप है कि पुलिस ने उन्हें समय रहते मौत की सूचना नहीं दी। कुछ लोगों को अपने बच्चों की मौत का पता उनके दोस्तों के जरिए चला। परिजनों का कहना है कि बाद में अधिकारियों ने उनसे जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने और दस्तखत करने को कहा, जबकि वे अपने बच्चों की स्थिति को लेकर अनजान थे।
मां का आरोप- जिंदा बेटे को पोस्टमार्टम हाउस भेज रहे थे पुलिसकर्मी
हादसे में जान गंवाने वाले गौरव की मां किरण ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि उनका बेटा जिंदा था, लेकिन पुलिसकर्मी उसे पोस्टमार्टम हाउस भेज रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही के कारण उनके बेटे की जान चली गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
एक अन्य महिला ने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंची, तो उसे अपने बच्चे से मिलने नहीं दिया गया। महिला के मुताबिक, उसे बताया गया कि उसका बच्चा ठीक है और उसका इलाज चल रहा है। बाद में उसे घर छोड़ दिया गया और फिर फोन पर बच्चे की मौत की सूचना मिली। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे अपने बच्चे का चेहरा तक नहीं दिखाया गया। उसने कहा कि उसका बेटा महज 17-18 साल का था और अब उसके पास कोई सहारा नहीं बचा है।
बेटे की मौत के बाद मां ने पूछा- मेरी बेटी को तलाशने क्यों नहीं दिया?
हादसे में अपने बेटे दिव्यांश को खोने वाली मां ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उन्हें हादसे की जानकारी सुबह करीब छह बजे मिली। उस समय उनकी बहू और परिवार के अन्य सदस्य भी वहां मौजूद थे।
दिव्यांश की मां का आरोप है कि उनकी बेटी परिवार के सदस्यों को तलाशने गई थी, लेकिन पुलिस ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। उन्होंने सवाल किया कि जब कोई परिजन लापता हो, तो उसे ढूंढने में पुलिस मदद क्यों नहीं कर रही थी। उन्होंने कहा कि अगर किसी के अपने बच्चे के साथ ऐसा होता, तो उसे भी उतनी ही तकलीफ होती।
इस हादसे में 15 लोगों की मौत और 25 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर के बीच परिजन प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि हादसे के बाद राहत, इलाज और सूचना देने की प्रक्रिया में कथित लापरवाही की जांच होनी चाहिए, ताकि घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। फिलहाल, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रशासन की ओर से आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
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