Last updated: October 18th, 2026 at 10:01 am

भारतीय नौसेना ने अपने पहले स्वदेशी मल्टी-पर्पस वेसल (MPV) *INS समर्थ* को आधिकारिक तौर पर बेड़े में शामिल कर लिया है। लार्सन एंड टुब्रो (L&T) शिपयार्ड द्वारा डिजाइन और निर्मित यह पोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी पुर्जों और सामग्री से तैयार किया गया है। इसे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर जहाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
INS समर्थ को नौसेना की समुद्री निगरानी, हथियार और सेंसर परीक्षण, अपतटीय गश्त तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) जैसे कई महत्वपूर्ण अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
उपराष्ट्रपति की मौजूदगी में हुआ कमीशनिंग समारोह
INS समर्थ के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता उपराष्ट्रपति *सी.पी. राधाकृष्णन* ने की। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख *एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन*, रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, नौसेना के प्रतिनिधि और L&T सहित कई स्वदेशी रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
नौसेना ने इस पोत को निजी क्षेत्र और रक्षा क्षेत्र के बीच बढ़ते सहयोग का बड़ा उदाहरण बताया है।
75% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री से तैयार
INS समर्थ की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वदेशी निर्माण है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक भारतीय सामग्री और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है।
इसके निर्माण में मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन और प्री-आउटफिटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया, जिससे निर्माण प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी बनी। इस परियोजना से घरेलू उद्योग, रोजगार सृजन और औद्योगिक क्षमता को भी बढ़ावा मिला है।
समुद्री निगरानी से लेकर आपदा राहत तक निभाएगा कई जिम्मेदारियां
INS समर्थ को एक बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख भूमिकाओं में शामिल हैं:
– समुद्री निगरानी और टोही अभियान
– अपतटीय गश्त
– हथियार और सेंसर का परीक्षण
– मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)
– प्रशिक्षण और तकनीकी मूल्यांकन
नौसेना का मानना है कि यह पोत स्वदेशी तकनीकों के परीक्षण के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
हिंद महासागर में बढ़ेगी नौसेना की ताकत
भारतीय नौसेना के मुताबिक, INS समर्थ के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन क्षमता और समुद्री सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। यह पोत पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों तरह की समुद्री चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा।
साथ ही, यह भारत के *’आत्मनिर्भर भारत’* अभियान और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को आगे बढ़ाने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
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