Last updated: August 31st, 2026 at 07:02 pm

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर तीखा हमला बोला है। अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नेतन्याहू पर अमेरिका को ईरान के खिलाफ संघर्ष में शामिल करने का आरोप लगाया और उन्हें ‘सांप’ कहकर संबोधित किया।
नेतन्याहू पर अमेरिका को प्रभावित करने का आरोप
अराघची ने हिब्रू भाषा में लिखे अपने पोस्ट में दावा किया कि नेतन्याहू सार्वजनिक रूप से इस बात का जिक्र करते हैं कि उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी प्रशासन को शामिल करने में भूमिका निभाई। ईरानी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू ने अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अमेरिकी नीति को प्रभावित किया।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करने और पर्दे के पीछे अलग भूमिका निभाने का आरोप लगाते हुए नेतन्याहू पर निशाना साधा।
अमेरिका को लेकर भी अराघची का सख्त रुख
ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका के साथ संभावित बातचीत और युद्ध के उद्देश्यों को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची ने दावा किया कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना था, लेकिन उनका देश ऐसा नहीं करेगा।
उन्होंने अमेरिका के साथ हुए एक समझौता ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि उसमें ईरान के पक्ष में 13 प्रावधान थे, जबकि अमेरिका के पक्ष में केवल एक प्रावधान था। अराघची ने आरोप लगाया कि इजरायल ने इस समझौते को लागू होने से रोकने की कोशिश की।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद बढ़ा तनाव
ईरानी विदेश मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया था और वहां दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। लारक द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक स्थित है।
इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई को अंजाम देने और उसका समर्थन करने के लिए किया गया था।
टकराव के बीच कूटनीतिक रास्ते पर भी नजर
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अराघची के बयान से साफ है कि तेहरान फिलहाल अपने रुख से पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ संभावित कूटनीतिक बातचीत पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
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