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अमेरिका की ‘डिन्यूक्लियराइजेशन’ नीति पर उत्तर कोरिया का पलटवार, किम शासन ने दी कड़े जवाब की चेतावनी

अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। उत्तर कोरिया ने राष्ट्रपति डोनाल्ड
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अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। उत्तर कोरिया ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर उसके खिलाफ लगातार शत्रुतापूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाया है। प्योंगयांग ने कहा है कि अमेरिका की मौजूदा रणनीति कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने के बजाय स्थिति को और गंभीर बना रही है।

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    उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से उसके पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को लेकर अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराए जाने के बाद सामने आई है। हालांकि, इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल के अंत में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से मुलाकात की संभावना भी जताई है।

    अमेरिका की नीति पर उत्तर कोरिया नाराज

    उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने अमेरिका पर डिन्यूक्लियराइजेशन और मानवाधिकारों के मुद्दे को लेकर दबाव बनाने का आरोप लगाया। सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका की लगातार कथित शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के बीच दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद करना मुश्किल है।

    प्योंगयांग का आरोप है कि अमेरिका उसकी संप्रभुता, राजनीतिक व्यवस्था और सुरक्षा हितों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उत्तर कोरिया ने यह भी कहा कि अमेरिकी नीति के जवाब में वह अपने रुख में कोई बदलाव नहीं करेगा।

    अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास से बढ़ी चिंता

    उत्तर कोरिया की नाराजगी की एक वजह अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास भी है। तीनों देशों ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि ‘फ्रीडम एज’ नाम का त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।

    प्योंगयांग लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के तौर पर देखता रहा है। उत्तर कोरिया ने आगामी अभ्यास को भी इसी संदर्भ में सैन्य उकसावे का हिस्सा बताया है।

    उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों को बताया सुरक्षा की गारंटी

    उत्तर कोरियाई अधिकारी ने अपने देश के परमाणु हथियारों को राष्ट्रीय संप्रभुता की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। प्योंगयांग का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का साधन है।

    उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया कि अमेरिका की सैन्य गतिविधियां कोरियाई प्रायद्वीप में अस्थिरता बढ़ा रही हैं। साथ ही उसने स्पष्ट संकेत दिया कि अमेरिकी नीतियों के खिलाफ वह आगे भी कड़ा रुख अपनाएगा।

    ट्रंप-किम मुलाकात की संभावना के बीच बढ़ा तनाव

    दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच बयानबाजी ऐसे समय में हुई है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ संभावित मुलाकात की इच्छा जताई है। ऐसे में एक ओर बातचीत की संभावनाओं के संकेत मिल रहे हैं, तो दूसरी ओर परमाणु निरस्त्रीकरण और सैन्य अभ्यास जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं।

    फिलहाल उत्तर कोरिया के ताजा बयान से यह साफ है कि प्योंगयांग अमेरिका की डिन्यूक्लियराइजेशन नीति और सैन्य गतिविधियों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत होती है या तनाव और बढ़ता है, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

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