Last updated: June 9th, 2026 at 06:19 am

Bihar Politics: आईआरसीटीसी होटल टेंडर मामले से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग केस में आज अदालत का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट यह तय करेगी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज मामले में राजद प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएं या नहीं।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत के आदेश से यह साफ होगा कि मामले में आगे नियमित सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी या नहीं।
ईडी की चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि उसके पास ऐसे पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
यह पूरा मामला उस अवधि से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के अनुसार रांची और पुरी स्थित आईआरसीटीसी के बीएनआर होटलों के संचालन और विकास का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया था। आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और बदले में लालू परिवार से जुड़ी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए जमीन का लेनदेन किया गया।
ईडी और सीबीआई का दावा है कि मामले में वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के पर्याप्त संकेत मिले हैं। इसी आधार पर सीबीआई ने पहले भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया था, जबकि ईडी ने कथित अवैध धन के लेनदेन को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
गौरतलब है कि मुख्य भ्रष्टाचार मामले में अदालत पहले ही आरोप तय कर चुकी है और उसकी सुनवाई जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत क्या रुख अपनाती है।
इस केस में लालू परिवार के अलावा कुछ पूर्व आईआरसीटीसी अधिकारी और संबंधित कारोबारी समूह के प्रतिनिधि भी जांच के दायरे में हैं। अदालत का फैसला आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय कर सकता है।
राजनीतिक रूप से भी इस निर्णय को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर बिहार की राजनीति और राजद की रणनीति पर पड़ सकता है। अदालत के आदेश के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरोपियों को इस मामले में पूर्ण ट्रायल का सामना करना होगा या नहीं।
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