Last updated: October 1st, 2026 at 02:37 pm

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों की सैलरी-भत्तों में बढ़ोतरी से जुड़े प्रस्तावों पर जमकर हंगामा हुआ। BJP विधायकों के विरोध के बाद सरकार को सैलरी और भत्तों से जुड़े दो बिल वापस लेने पड़े। वहीं, पूर्व विधायकों की पेंशन से संबंधित संशोधन विधेयक सदन में पास हो गया।
सैलरी बढ़ाने वाले बिलों पर BJP का विरोध
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जब ‘J&K मिनिस्टर्स एंड मिनिस्टर्स ऑफ स्टेट सैलरीज़ एक्ट, 1956’ में संशोधन का बिल चर्चा के लिए पेश किया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए इसे सदन के सामने रखा। इस पर स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने उनकी मुस्कान को लेकर टिप्पणी भी की।
इसके बाद BJP सदस्यों ने मंत्रियों और विधायकों की सैलरी व भत्तों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव का विरोध किया। BJP विधायक शाम लाल शर्मा ने मुख्यमंत्री से तीनों बिल वापस लेने की अपील की।
शर्मा ने कहा कि विधायकों की सैलरी की समीक्षा करने वाली समिति की सिफारिशें सार्वजनिक होने से विधायकों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रस्तावित मानदेय पर भी आपत्ति जताई और कहा कि सरकार को संसाधनों का इस्तेमाल दिहाड़ी कर्मचारियों के नियमितीकरण समेत कर्मचारियों की लंबित मांगों को पूरा करने में करना चाहिए।
उमर बोले- इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होने देंगे
BJP की आपत्तियों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि सैलरी बढ़ोतरी के मुद्दे पर राजनीति होगी। उन्होंने कहा कि अगर BJP विधायक इस मुद्दे पर पार्टी के सदस्यों से अलग-अलग बात करेंगे तो उन्हें ऐसा कोई सदस्य नहीं मिलेगा जो वास्तव में बढ़ोतरी के खिलाफ हो।
उमर ने कहा कि सरकार सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक सदन में आम सहमति नहीं बनती। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर एक भी सदस्य विधेयक के खिलाफ है, तो उसे पास कराना उनके लिए मुश्किल होगा।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और विधायकों की सैलरी से जुड़े दोनों विधेयक वापस लेने की घोषणा कर दी। मेहराज मलिक ने बिल पर बोलने की कोशिश की, लेकिन स्पीकर ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बिल वापस लेने का प्रस्ताव दिए जाने के बाद उस पर चर्चा आगे नहीं बढ़ सकती।
दिहाड़ी कर्मचारियों के मुद्दे पर भी हुई बहस
सदन में चर्चा के दौरान NC विधायक जावेद बेग ने आरोप लगाया कि BJP विधायक सैलरी बढ़ोतरी का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे मानदेय को बढ़ाकर तीन लाख रुपये करना चाहते हैं।
उमर अब्दुल्ला ने भी दिहाड़ी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर BJP के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर समिति के सामने यह मुद्दा रखा गया था तो उसकी रिपोर्ट में इसका उल्लेख होना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सैलरी समीक्षा समिति में शामिल BJP सदस्यों ने उसकी सिफारिशों के खिलाफ कोई असहमति नोट नहीं दिया था।
उमर ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से प्रस्तावित सैलरी बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने कई बार इसकी जरूरत पर सवाल उठाए थे। हालांकि, कुछ विधायकों की मांग के बाद वह बिल पेश करने के लिए तैयार हुए थे।
पेंशन बढ़ाने वाला बिल BJP के समर्थन से पास
सदन में तीखी बहस के बीच स्पीकर ने सदस्यों को याद दिलाया कि सैलरी से जुड़े दोनों बिल वापस लिए जा चुके हैं, इसलिए इस पर आगे बहस का कोई औचित्य नहीं है। बाद में ‘J&K स्टेट लेजिस्लेचर मेंबर्स पेंशन एक्ट, 1984’ में संशोधन से जुड़ा बिल वॉइस वोट के जरिए पास कर दिया गया। इस बिल को BJP सदस्यों का भी समर्थन मिला। इस तरह विधानसभा में मंत्रियों और मौजूदा विधायकों की सैलरी-भत्तों से जुड़े दोनों प्रस्ताव वापस हो गए, जबकि पूर्व विधायकों की पेंशन से संबंधित संशोधन विधेयक पारित हो गया।
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