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सीमावर्ती इलाकों के युवाओं को शिक्षा और टेक्नोलॉजी के समान अवसर मिलें: LG सिन्हा

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सीमावर्ती और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले युवाओं को शिक्षा, टेक्नोलॉजी और रोजगार
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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सीमावर्ती और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले युवाओं को शिक्षा, टेक्नोलॉजी और रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के बच्चों को भी बड़े शहरों में रहने वाले छात्रों की तरह आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन और मार्गदर्शन मिलना चाहिए।

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    सिन्हा मंगलवार को वाडीज़ हिंदी शिक्षा समिति की ओर से जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी (JKAACL) के सहयोग से आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में होनहार छात्रों को सम्मानित किया गया।

    ‘सीमावर्ती गांव का हर बच्चा अपने सपने पूरे करने का भरोसा रखे’

    उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास का वास्तविक पैमाना तब सामने आएगा, जब सीमावर्ती गांवों में रहने वाला हर बच्चा आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सके।

    उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा, साहस और दृढ़ संकल्प की कमी नहीं है। जरूरत है कि उन्हें सही अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। सिन्हा ने युवाओं के सशक्तिकरण के लिए शिक्षा-टेक्नोलॉजी, रोजगार-एंटरप्रेन्योरशिप, खेल-संस्कृति, अवसरों से जोड़ने और मेंटरशिप को प्रमुख क्षेत्र बताया।

    स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लाइब्रेरी पर जोर

    उपराज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं को दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और स्किल डेवलपमेंट के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

    उन्होंने हस्तशिल्प, बागवानी, कृषि, पर्यटन और स्थानीय उद्योगों जैसे क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यम शुरू करने और रोजगार देने में सक्षम बनाया जाना चाहिए।

    सिन्हा ने यह भी कहा कि किताबें, खेल सामग्री, टेक्नोलॉजी और कला से जुड़ी गतिविधियां सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं तक पहुंचनी चाहिए, ताकि उनकी प्रतिभा और ऊर्जा को रचनात्मक दिशा मिल सके।

    स्कॉलरशिप और डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहुंच बढ़ाने के निर्देश

    सिन्हा ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को अवसरों की कमी के कारण बड़े शहरों के छात्रों से पीछे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे क्षेत्रों में स्कॉलरशिप, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, ट्रेनिंग प्रोग्राम और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से जुड़े अवसर पहुंचाने को कहा।

    उन्होंने जम्मू-कश्मीर के अनुभवी पेशेवरों से भी इन क्षेत्रों के छात्रों के साथ नियमित संवाद करने की अपील की। सिन्हा ने सुझाव दिया कि जाने-माने प्रोफेशनल्स साल में कम से कम दो बार ऐसे बच्चों से मुलाकात करें या जम्मू और श्रीनगर में कार्यक्रमों के जरिए उन्हें मार्गदर्शन दें।

    भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने की अपील

    कार्यक्रम में उपराज्यपाल ने मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भाषा किसी व्यक्ति की पहचान, स्मृति और सांस्कृतिक जुड़ाव का अहम हिस्सा है। जम्मू-कश्मीर की भाषाई विविधता देश की साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

    सिन्हा ने छात्रों से अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने के साथ-साथ विज्ञान, टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप और आधुनिक ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपील की।

    उन्होंने वाडीज़ हिंदी शिक्षा समिति के हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की और सम्मानित छात्रों को शुभकामनाएं दीं।

    अधिकारी, शिक्षाविद और छात्र रहे मौजूद

    समारोह में संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव बृज मोहन शर्मा, स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव राम निवास शर्मा, कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग, श्रीनगर के SSP डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती, श्रीनगर के उपायुक्त अक्षय लाब्रू, JKAACL की सचिव हरविंदर कौर और वाडीज़ हिंदी शिक्षा समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष नसरीन अली निधि समेत कई अधिकारी और शिक्षाविद मौजूद रहे।

    कार्यक्रम में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, नागरिक, शिक्षण संस्थानों के प्रमुख, शिक्षक तथा आर्मी गुडविल स्कूल और केंद्रीय विद्यालयों के छात्र भी शामिल हुए। समारोह में छात्रों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षा, भाषा, संस्कृति और अवसरों की पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया गया।

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