Last updated: September 25th, 2026 at 10:51 am

बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से हुई कथित बदसलूकी का मामला अब सियासी विवाद में बदल गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पीड़िता और उसके परिवार के साथ मुलाकात की तस्वीर साझा की गई, जिसमें नाबालिग की पहचान उजागर होने की आशंका थी। विवाद के बीच यह पोस्ट बाद में हटा दिया गया।
तेजस्वी ने POCSO एक्ट का हवाला देकर उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए आरोप लगाया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना POCSO एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कानून के तहत यौन अपराध की शिकार नाबालिग की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
तेजस्वी ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग भी की और सवाल उठाया कि जब कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी सरकार की है, तो उसी से जुड़े लोगों पर भी कानून के प्रावधान लागू होने चाहिए।
CM से मिलने पहुंचा था पीड़िता का परिवार
रिपोर्टों के मुताबिक, जमुई मामले की नाबालिग पीड़िता अपने परिजनों के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिली थी। मुख्यमंत्री ने परिवार को जल्द न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया था।
इसके बाद मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से मुलाकात की तस्वीर पोस्ट की गई। तस्वीर सामने आने के बाद विपक्ष ने पीड़िता की निजता को लेकर सवाल खड़े किए। बाद में पोस्ट हटा दिया गया। पोस्ट हटाने की आधिकारिक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं की गई है।
पहले से ही वीडियो शेयरिंग को लेकर कार्रवाई
जमुई मामले में नाबालिग की पहचान सामने आने वाले वीडियो और पोस्ट को लेकर पुलिस पहले ही कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने वाले कई अकाउंट्स को लेकर FIR दर्ज की है और पहचान उजागर करने वाले कंटेंट को साझा नहीं करने की अपील की है।
ऐसे में मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर उठे सवाल ने मामले को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। फिलहाल तेजस्वी यादव के आरोपों पर मुख्यमंत्री की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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