Last updated: May 8th, 2026 at 12:26 pm

Bihar Politics: बिहार की सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में पहली बार विधायक बनीं श्वेता गुप्ता को मंत्री बनाए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। समाज कल्याण जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी देकर जेडीयू नेतृत्व ने केवल एक नए चेहरे को मौका नहीं दिया, बल्कि कई बड़े राजनीतिक संकेत भी दे दिए हैं।
शिवहर से विधायक बनीं श्वेता गुप्ता पेशे से डॉक्टर हैं और लंबे समय तक चिकित्सा क्षेत्र में काम कर चुकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उन्हें मंत्री बनाकर जेडीयू ने वैश्य समाज को साधने के साथ-साथ शिवहर लोकसभा की राजनीति में भी नया समीकरण तैयार किया है।
दरअसल, हाल के दिनों में पूर्व सांसद आनंद मोहन लगातार पार्टी नेतृत्व और कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर बयान दे रहे थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पार्टी के बड़े फैसलों पर केवल नीतीश कुमार की छाप दिखनी चाहिए और कार्यकारी अध्यक्ष पद की जरूरत नहीं है। उनके इन बयानों को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष हमला माना गया।
इसी बीच श्वेता गुप्ता को मंत्री बनाकर जेडीयू ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब नए चेहरों और नए सामाजिक समीकरणों पर दांव लगाने की तैयारी में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला शिवहर लोकसभा क्षेत्र की भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर लिया गया है।
शिवहर सीट से वर्तमान सांसद लवली आनंद हैं, जिन्हें 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए उम्मीदवार के तौर पर जीत मिली थी। हालांकि उस चुनाव में वैश्य वोटरों की नाराजगी की चर्चा भी रही थी। ऐसे में अब वैश्य समाज से आने वाली श्वेता गुप्ता को मंत्री बनाकर पार्टी ने एक नया शक्ति केंद्र खड़ा कर दिया है।
इसके अलावा आनंद मोहन के बेटे और विधायक चेतन आनंद को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने को भी राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि जेडीयू नेतृत्व संगठन और सत्ता दोनों में संतुलन साधते हुए भविष्य की रणनीति तैयार कर रहा है।
श्वेता गुप्ता ने 2025 विधानसभा चुनाव में शिवहर सीट से बड़ी जीत दर्ज की थी। इससे पहले वे सामाजिक और चिकित्सा कार्यों के जरिए क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकी थीं। अब मंत्री बनने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ने की संभावना मानी जा रही है।
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