Last updated: September 25th, 2026 at 12:06 pm

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। प्रस्ताव में 26 जून 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का जिक्र किए जाने पर BJP विधायकों ने आपत्ति जताई और सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी।
2000 के ऑटोनॉमी प्रस्ताव के जिक्र पर BJP का विरोध
उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया। इसमें 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को विधानसभा द्वारा पारित प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है।
2000 का प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर के लिए अधिक स्वायत्तता की मांग से जुड़ा था। इसी पुराने प्रस्ताव का जिक्र मौजूदा स्टेटहुड प्रस्ताव में किए जाने पर BJP सदस्यों ने विरोध जताया। BJP विधायक आर.एस. पठानिया ने कहा कि पार्टी सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देगी।
प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ीं, सदन में बढ़ा हंगामा
BJP विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। विरोध के दौरान कुछ सदस्यों ने प्रस्ताव की प्रतियां भी फाड़ दीं। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच नारेबाजी तेज हो गई।
स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने BJP विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा। हंगामे के बीच BJP विधायक विक्रम रंधावा को मार्शल के जरिए सदन से बाहर निकाला गया।
आधे घंटे बाद फिर शुरू हुई कार्यवाही, बाद में सोमवार तक स्थगित
हंगामे को देखते हुए स्पीकर ने पहले सदन की कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित की। कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी BJP सदस्यों का विरोध जारी रहा। इसके बाद लगातार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
उमर अब्दुल्ला के प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की गई है और प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजने की बात कही गई है।
![]()
Comments are off for this post.