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कश्मीर के लाल का कमाल! गांदरबल के छात्र को अमेरिका के MIT में मिला दाखिला, बनाया ‘कृषिबॉट’ रोबोट

मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले से एक बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि सामने आई है, जहां एक छात्र को अमेरिका के प्रतिष्ठित
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मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले से एक बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि सामने आई है, जहां एक छात्र को अमेरिका के प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए प्रवेश मिला है। इस सफलता को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक मील का पत्थर माना जा रहा है।

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    साधारण परिवार से वैश्विक मंच तक

    गांदरबल के नन्नर गांव निवासी छात्र मुहम्मद अब्दुल रहीम को MIT से दाखिले का ऑफर मिला है। वे फिलहाल 11वीं कक्षा के छात्र हैं और अपनी पढ़ाई सरकारी बॉयज़ हायर सेकेंडरी स्कूल, गांदरबल में कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई हिलटॉप एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, डारेंड से पूरी की थी। एक साधारण परिवार से आने वाले अब्दुल रहीम ने अपनी मेहनत और आत्म-शिक्षा के दम पर प्रोग्रामिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में मजबूत पहचान बनाई है।

    “कृषिबॉट” बना पहचान की वजह

    उनका सबसे चर्चित इनोवेशन “कृषिबॉट” (KrishiBot) एक स्मार्ट फार्मिंग रोबोट है, जिसे आधुनिक खेती में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह प्रोजेक्ट किसानों को फसल निगरानी, संसाधन प्रबंधन और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस इनोवेशन को तकनीकी विशेषज्ञों और इनोवेशन समुदायों से सराहना मिल चुकी है और इसे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन

    अब्दुल रहीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा साबित की है। उन्होंने मेटा हैकर कप 2024 में 258वीं रैंक हासिल की। इसके अलावा ICode प्रतियोगिता में उन्होंने भारत में चौथा, एशिया में छठा और वैश्विक स्तर पर 42वां स्थान प्राप्त किया, जो उनकी प्रोग्रामिंग और समस्या समाधान क्षमता को दर्शाता है।

    भविष्य की तैयारी

    MIT में अपनी शैक्षणिक यात्रा शुरू करने की तैयारी के साथ अब्दुल रहीम का लक्ष्य कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के क्षेत्र में शोध और नवाचार को आगे बढ़ाना है। गांदरबल के एक छोटे से गांव से दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी तक का उनका यह सफर जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है और यह दिखाता है कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

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